Sunday, April 12, 2026
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कानपुर के डफरिन अस्पताल में मरीजों को इलाज के बदले मिलती फटकार

-ओपीडी में सिर्फ दो ही डॉक्टर देखते हैं मरीज

-आशा कार्यकत्रियों ने अस्पताल में बनाया गैंग

कानपुर (हि.स.)। महिला जिला अस्पताल डफरिन में अगर आप अपने मरीज को डॉक्टर से दिखाने को ला रहे हैं तो आप अपने पास समय और सहनशीलता भी साथ जरुर लायें। क्योंकि यहां पर आने वाली महिला मरीजों का डॉक्टर इलाज नहीं करते है बल्कि उन्हें फटकार कर अगले दिन आने की बात कहकर भगा दिया जाता है। कुछ ऐसा ही नाजारा गुरुवार को उस वक्त देखने को मिला जब दूर-दराज से आयी गर्भवती महिलाएं ओपीडी के बाहर चीखते-चिल्लाते हुए डॉक्टरों पर इलाज न करने का आरोप लगा रही थी। कहा कि यहां की डॉक्टर मरीजों के इलाज के बदले फटकार लगाती हैं। जबकि वे इलाज के लिए कई दिनों से ओपीडी के चक्कर लगा रही है।

इलाज के लिए रामादेवी से आई गर्भवती महिला सपना ने बताया कि वह तीन दिनों से जिला अस्पताल डफरिन में आ रही है। ओपीडी की लाइन में लगती है और जब तक उनका समय आता है तो डॉक्टर उठ जाती है। कक्ष से डॉक्टर के बाहर निकलने के दौरान जब वे रोककर एक बार देखने को कहती है तो उन्हें फटकार कर यह कह दिया जाता है कि आज उनकी ओपीडी खत्म हो गई और अगले दिन आओ। उनके साथ तीन दिन से यही सिलासिला चलता चला आ रहा है। इसी तरह जाजमऊ से आई राबिया ने भी यह आरोप लगाया कि उनके साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है। यहां की डॉक्टर को बात करने का तरीका नहीं मालूम है वह सभी को यह कहकर भगा देती है कि जब तुम्हारा नम्बर आयेगा तब आना।

आशा कार्यकत्रियों का चलता है जुगाड़

डफरिन अस्पताल में पहले दलालों का गैंग सक्रिय रहता था तो अब आशा कार्यकत्रियों के रुप में कुछ महिलाएं अपना मकड़जाल बुने हुए हैं। बाबूपुरवा से आई महिला सीमा का कहना है कि डफरिन में आशा कार्यकत्रियों का जुगाड़ चलता है। अगर उन्हें कुछ रुपये मुहैया करा दिया जाता है तो वे अपने जुगाड़ से फौरन पर्चा बनवाकर डॉक्टर से दिखवा भी देती है। जांच भी वह स्वयं ही करा देती है। ऐसी कई महिलाओं ने किया है, लेकिन उनके पास पैसे न होने के चलते यहां के चक्कर काट रही है।

ओपीडी में बैठती है दो डॉक्टर

डफरिन अस्पताल में जिस वक्त तक की ओपीडी चलती है सिर्फ यहां पर दो ही डॉक्टर बैठती है। वो ही इन मरीजों को देखती है। बीच-बीच में इमरजेंसी पड़ने पर वह ओपीडी से भी वार्डों में जाती है। इसकी वजह से ओपीडी में आने वाली अधिकांश मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है और मायूस होकर घर को लौट जाती है।

बोले जिम्मेदार

इस संबंध में कार्यवाहक प्रमुख अधीक्षका डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने बताया कि ओपीडी में आ रही समस्याओं से अवगत है। डॉक्टरों की कमी होने के चलते ओपीडी में दो डॉक्टरों की ड्यूटी लगायी जा रही है। मौजूदा समय में उनके पास सात महिला चिकित्सक है जो पूरे अस्पताल का कार्यभार देख रही है। प्रतिदिन 30 से 40 आपरेशन किया जा रहा है। ओपीडी में लगभग तीन सौ से 350 मरीज आ रहे है। उनका प्रयास है कि सभी मरीजों को इलाज मुहैया कराया जाये। आगे कहा कि अस्पताल में फैले आशा कार्यकत्रियों के गैंग पर चाबुक चलाने के लिए सीएमओ से सूची मांगी गई है। जल्द ही फर्जी आशा कार्यकत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा जायेगा।

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