Sunday, February 15, 2026
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कानपुर की सबसे पुरानी आर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री सहित पांचों रक्षा प्रतिष्ठानों में लगी प्रदर्शनी

राष्ट्रीय आयुध कारखानों दिवस पर अपने बेहतर उत्पादों को प्रसारित कर रहें प्रतिष्ठान

कानपुर (हि.स.)। ब्रिटिश काल में पश्चिम बंगाल से अंग्रेंजों ने भारत में सत्ता स्थापित करने की शुरुआत की। इसी क्षेत्र के कोसीपुर कोलकाता में सबसे पहले उन्होंने 18 मार्च 1802 में आयुध निर्माणी फैक्ट्री की स्थापना की। इसे अब ‘गन एंड शेल फैक्टरी’ के नाम से जाना जाता है। इसके बाद देश के अन्य महत्वपूर्ण शहरों में आयुध निर्माण फैक्ट्रियों की शुरुआत हुई जिनमें औद्योगिक नगर कानपुर भी रहा। यहां पर अंग्रेंजों ने सबसे पहले 1859 में सैनिकों के लिए कपड़े, जूते व टेंट समेत रोजमर्रा में काम आने वाले अन्य उपकरण बनाने के लिए आर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री को डाला। हालांकि उस समय इस फैक्ट्री का नाम हार्नस एंड सेडलरी फैक्ट्री था। इसके बाद समय—समय पर चार अन्य रक्षा प्रतिष्ठान खोले गयें जो देश की सुरक्षा के लिए उपकरण तैयार कर रहे हैं और आज राष्ट्रीय आयुध कारखानों दिवस के अवसर पर पांचों प्रतिष्ठान अपने बेहतर उत्पादों की प्रदर्शनी लगाए हुए हैं। 
देशभर के आयुध कारखाने आज के दिन को आयुध कारखानों दिवस के रुप में मना रहे हैं। यह आयुध निर्माणी का 219 वां स्थापना दिवस है। हर साल 18 मार्च को आयुध कारखानों दिवस मनाया जाता है। भारत की सबसे पुरानी आयुध फैक्टरी कोलकाता के कोसीपोर में है, जिसकी शुरुआत 18 मार्च 1802 में हुई थी। हालांकि अब यह ‘गन एंड शेल फैक्टरी’ के नाम से जानी जाती है। आज के दिन पूरे भारत में प्रदर्शनियों में राइफलों, तोपों, तोपखाने, गोला-बारुद आदि का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसमें कानपुर नगर भी अछूता नहीं है और यहां के पांचों आयुध निर्माणी प्रतिष्ठानों में प्रदर्शनी लगी है, जो सेना के जवानों को हथियार और सुरक्षा उपकरण मुहैया करा रहे हैं। इन्ही हथियारों और सुरक्षा उपकरण से सेना के जवान दुष्मनों को मुंहतोड़ जबाब दे रहे हैं। यहां आधुनिक गन से लेकर पैराशूट तक 20 से अधिक उपकरण बन चुके हैं, जो मेक इन इंडिया का ख्वाब साकार कर रहे हैं। लघु शस्त्र निर्माणी (एसएएफ) में हाल ही में विकसित की गई ज्वाइंट प्रोटेक्टिव वेंचर्स कार्बाइन एक सशक्त हथियार है। सेना में सफल परीक्षण के बाद अब इसे सौंपने की तैयारी है।निर्भीक रिवाल्वर महिलाओं को कर रही आकर्षित
एसएएफ में मार्क-1, मार्क-2, मार्क-3 व मार्क-4 रिवॉल्वर भी बनाई जा चुकी हैं, जिन्हें बेहद पसंद किया गया। एसएएफ में हथियार बनाने की शुरुआत ब्रेनगन से हुई थी। इसके बाद एक से बढ़कर एक हथियार बने। इन दिनों यहां का अमोघ, इंसास-5.56 व मैगगन मेक इन इंडिया का बेहतरीन नमूना हैं। बेल्ड फेड एलएमजी भी बनकर तैयार है। अब यह ट्रायल के लिए जानी है। सेना के साथ आमजन के लिए बनने वाली रिवॉल्वर ‘प्रहार’ भी देशभर में पसंद की जा रही है।  अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए 11 मार्च को इसे बेस्ट ऑर्डनेंस फैक्ट्री अवार्ड से नवाजा गया है। यहां पर महिलाओं के लिए महज साढ़े तीन सौ ग्राम की निर्भीक रिवॉल्वर भी बनाई गई हैं।शहर में यह हैं रक्षा प्रतिष्ठान
ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड से देशभर में 41 फैक्ट्री जुड़ी हैं। शहर में पांच रक्षा प्रतिष्ठान हैं जिनमें 14 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें ऑर्डनेंस फैक्ट्री, फील्ड गन फैक्ट्री, स्माल आम्र्स फैक्ट्री, ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री और ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री शामिल हैं। आर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री सबसे पुरानी है। इसकी स्थापना 1859 में हुई थी। पहले इसका नाम हार्नस एंड सेडलरी फैक्ट्री था।ऑर्डनेंस फैक्ट्री, फील्ड गन फैक्ट्री व स्माल आम्र्स फैक्ट्री में सेना के हथियार बनते हैं। ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री व ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री में सैनिकों के लिए कपड़े, जूते व टेंट समेत रोजमर्रा में काम आने वाले अन्य उपकरण बनते हैं।  फैक्ट्रियों में हथियार, जूते, टेंट, पीपीई किट, हिमताप बुखारी व पैराशूट बनते हैं। फील्ड गन के बड़े हथियारों में विजेता टैंक व धनुष हैं। 41 आयुध कारखानों का समूह है ओएफबी
वास्तव में आयुध निर्माणी देशभर में कुल 41 आयुध कारखानों का एक समूह है। इसका मुख्यालय अयोध्या भवन, कोलकाता में आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) है। ओएफबी वर्ष 1979 में 02 अप्रैल के दिन अस्तित्त्व आया। वर्तमान में ओएफबी रक्षा उपकरण बनाने वाला विश्व का 37 वां सबसे बड़ा निकाय है। ओएफबी अपने नए उपकरण की रिसर्च के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और आईआईटी जैसे संस्थानों की मदद लेता है। उनके सहयोग से बड़े पैमाने पर अनुसंधान और विकास के कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा ओएफबी ने उच्च श्रेणी की रिसर्च के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के साथ भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया है।

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