Tuesday, March 3, 2026
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कानपुर : आईआईटी के टेक फॉर ट्राइबल्स से आत्मनिर्भर हो रहे हैं आदिवासी : निदेशक

आदिवासी समुदायों में अद्वितीय समर्पण के साथ आईआईटी जारी रखेगा कार्य

कानपुर (हि.स.)। देश के आदिवासियों को आत्मानिर्भर बनाने के लिए आईआईटी कानपुर एक अनूठा कार्यक्रम ‘टेक फॉर ट्राइबल्स’ संचालित कर रहा है। इससे जुड़कर हमें गर्व हो रहा है। यह आदिवासी उद्यमियों और शहरी बाजारों के बीच की खाई को पाटने पर केंद्रित है। इस अनूठी पहल में आईआईटी कानपुर के योगदान द्वारा लाया गया तकनीकी परिवर्तन जनजातीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाले परिवर्तन के एक प्रकाश स्तंभ के रूप में उभरा है। मुझे विश्वास है कि इस तरह के हस्तक्षेप से आदिवासी आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी चुनौतियों से ऊपर उठेंगे। यह बातें बुधवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने कही।

छत्तीसगढ़ और केरल में आदिवासी बस्तियों और वैश्विक बाजारों के बीच की खाई को पाटने के लिए ‘आदिवासियों के लिए तकनीक’ पहल को आईआईटी कानपुर डिजिटल रूप से लागू कर रहा है। आईआईटी के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर, फाउंडेशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एफआईआरएसटी) द्वारा संचालित ‘टेक फॉर ट्राइबल्स’ वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण में बीओपी उद्यमिता के लिए प्रासंगिक पाठ्यक्रम सामग्री के माध्यम से आदिवासी उद्यमियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करता है और कार्यक्रम के तहत 6000 से अधिक लाभार्थियों का समर्थन करेगा। आईआईटी ने ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राइफेड) के वनधन वार्षिक पुरस्कारों के उद्घाटन पर अपने ‘टेक फॉर ट्राइबल’ कार्यक्रम के लिए प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ उद्यमी कौशल प्रशिक्षण परियोजना का पुरस्कार जीता है। ‘टेक फॉर ट्राइबल्स’ पहल का उद्देश्य वनधन विकास केंद्रों (वीडीवीके) के माध्यम से संचालित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से उद्यमिता विकास, सॉफ्ट स्किल्स, आईटी और व्यवसाय विकास पर ध्यान देने के साथ आदिवासियों का समग्र विकास करना है।

व्यवसायीकरण के रास्ते पर आ रहे आदिवासी

फाउंडेशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एफआईआरएसटी) के सीईओ डॉ निखिल अग्रवाल ने कहा कि टेक फॉर ट्राइबल्स के माध्यम से हमने फाउंडेशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एफआईआरएसटी) में आदिवासी उद्यमियों को अपने व्यवसायों के प्रभाव को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया है। इसने आदिवासी उद्यमियों को व्यवसायीकरण के रास्ते पर लाने में मदद की है। यह उपलब्धि टीम को प्रेरित करेगी और कार्यक्रम के लाभार्थियों को और अधिक लाभ प्राप्त कराने के लिए उनके प्रयासों में ऊर्जा का संचार करेगी।

प्रो0 अमिताभ बंद्योपाध्याय ने कहा कि इस उपलब्धि ने हमारी टीम को आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए उत्साह से काम करने के लिए प्रेरित किया है। हमारा मानना है कि “टेक फॉर ट्राइबल्स’ में लाभार्थियों के प्रभाव और परिणामों को और मजबूत करने की जबरदस्त क्षमता है, जो देश के सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने में मददगार होगी। हम भारत में आदिवासी समुदायों में अद्वितीय समर्पण के साथ काम करना जारी रखेंगे।

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