Monday, April 6, 2026
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कवियों ने जेल में निरूद्ध बंदियों को जम के लगवाये ठहाके

फिरोजाबाद (हि.स.)। समाज सेवी संस्था ताज सेवा समिति फिरोजाबाद के सहयोग से शनिवार को जिला जेल फिरोजाबाद में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

कवि सम्मेलन में श्रृंगार रस, प्रेमरस, हास्यरस आदि की कविताऐं सुनाई गयी। कवि प्रशान्त उपाध्याय द्वारा ‘प्रश्न जब ज्वलन्त हो गया, आदमी हलन्त हो गया, पाल ली हो चा चोलियां, आज कल महन्त हो गया’, कवि गिरीश जैन (गगन) द्वारा- ‘जन्म कबूतर का मिला, बाजों का हैं गांव, तेरी किस्मत कहां, बरगद वाली छांव। कवि तनवीर मोहसिनी द्वारा ‘तेरा खून न काला न मेरा खून सफेद, तो फिर ये कैसा है मतभेद। कवि विष्णु उपाध्याय ‘विशु’ द्वारा -सरहद से आयी जो बेटे की वर्दी, हालात पे मां की करवां रो पड़ा है, मिले थे जहां वो मको रो पड़ा है, मुझे देख पागल जहां रो पड़ा है।

कवि असलम अदीब द्वारा -दिखता है जो जैसा वहां वैसा नहीं होता, हर शख्स गुनाहों में तो डूबा नहीं होता, हालात बना देते हैं, इंसान को मुजरिम, मुजरिम कोई इंसान तो पैदा नहीं होता, कवि कलीम नूरी द्वारा-ये भर लेती है दामन में सिसकती आंख के आसू, मुहब्बत वो है जो टूटे दिलों को जोड़ देती है, आदि कविताऐं सुनाई गयी। कविताओं को सुनकर बंदियों ने तालियों के साथ जमकर ठहाके लगाये। कवि सम्मेलन मे आये कवियों का जेल अधीक्षक अनिल कुमार राय तथा जेलर आनन्द सिंह द्वारा शॉल उड़ाकर तथा माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर उप जेलर अरूण कुमार सिंह, सलीम धम्मू, अश्वनी राजौरिया आदि उपस्थित रहें।

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