मेरठ (हि.स.)। कबाड़ से जुगाड़ करके मेरठ शहर को सजाने वाला नगर निगम इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा भी पा चुका है। नगर निगम ने कबाड़ से जुगाड़ करके महात्मा गांधी का स्टेच्यू बनाया। इंटरनेट मीडिया पर स्टेच्यू के मुंह को लेकर खूब आलोचना हुई। इसके बाद नगर निगम ने स्टेच्यू को हटा दिया है।
मेरठ नगर निगम ने कबाड़ से जुगाड़ करके शहर के कई चौराहों पर कलाकृति बनाई है। इसमें सर्किट हाउस के बाहर, गांधी आश्रम चौराहा, तेजगढ़ी चौराहा, बच्चा पार्क चौराहा आदि स्थान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी नगर निगम के इस प्रयास की सराहना की थी। अब मेरठ नगर निगम ने कबाड़ से जुगाड़ कर महात्मा गांधी का स्टेच्यू बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस स्टेच्यू को कमिश्नरी चौराहे के पास सेल्फी प्वाइंट पर लगाया गया। नगर निगम का यह प्रयास लोगों के गले नहीं उतरा और इंटरनेट मीडिया पर इस स्टेच्यू का चेहरा भद्दा होने की बात कहकर आलोचना शुरू हो गई। इंटरनेट मीडिया पर लोगों ने इसे शर्मनाक और महात्मा गांधी का अपमान बताया। लोगों ने इसे महात्मा गांधी के नाम पर भद्दा मजाक बताया।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू ने इंटरनेट प्लेटफार्म एक्स पर स्टेच्यू की स्थापना की आलोचना की और इसे महात्मा गांधी का अपमान करार दिया। अपनी फजीहत होते देखकर नगर निगम बैकफुट पर आ गया। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने महात्मा गांधी के स्टेच्यू को हटाने के निर्देश जारी कर दिए। इसके बाद इस स्टूच्यू को सेल्फी प्वाइंट से हटा लिया गया। इस स्टेच्यू को इको इंडिया इनोवेशन कंपनी के आर्टिस्ट डॉ. प्रिंस राज ने तैयार किया और इसके निर्माण पर लगभग एक लाख रुपए खर्च हुए। यह स्टेच्यू ऑयल ड्रम के स्क्रैप, रिक्शा के व्हील, नट बोल्ड से तैयार किया गया। इसे बनाने में 15 दिन से ज्यादा का समय लगा।
अपर नगर आयुक्त का कहना है कि दो अक्टूबर को गांधी जंयती पर कबाड़ से जुगाड़ करके बापू का स्टेच्यू तैयार किया गया था। फीडबैक मांगने पर जनता ने कई सुझा दिए। यह स्टेच्यू फीडबैक के लिए लगाया गया था। इसे हटाकर अच्छा स्टेच्यू लगाया जाएगा।
कुलदीप/मोहित
