नोएडा (हि.स.)। सुपरिचित कथाकार नीलाक्षी सिंह को पहला सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने लिया। यह पुरस्कार नीलाक्षी सिंह को उनकी ‘हुकूम देश का इक्का खोटा’ रचना के लिए दिया जाएगा है।
इस पुरस्कार के लिए गठित चयन समिति में कथाकार कालिया के अलावा प्रख्यात कवि मदन कश्यप, कथाकार एवं ‘तद्भव’ पत्रिका के संपादक अखिलेश और सेतु प्रकाशन की प्रबंधक अमिता पाण्डेय शामिल थीं। निर्णायक मंडल ने 73 पाण्डुलिपियों में से नीलाक्षी सिंह की ‘हुकूम देश का इक्का खोटा’ का चयन किया गया। यह निर्णय सेतु प्रकाशन की बैठक में लिया गया।
पाण्डुलिपि के बारे में निर्णायक मंडल की अध्यक्ष ममता कालिया ने बताया कि अक्सर हम भावुकता में अपनी तकलीफ को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। कम-से-कम बोलकर अपनी पीड़ा का इजहार करना, यही इस पुस्तक की विशेषता है, जो अक्सर नीलाक्षी सिंह की अन्य रचनाओं में भी नजर आता है। तकलीफ में छप-छप नहाना और तकलीफ के बारे में निरपेक्ष होकर लिखना दोनों बहुत अलग-अलग बातें हैं। यह अनोखा गद्य है।
अखिलेश ने कहा कि यह अनोखी रचना है; न तो रचना और न ही रचनाकार को आपसे किसी करुणा या सहानुभूति की अपेक्षा है। अपने दुख, तकलीफ को इतने कलात्मक अंदाज में दूसरों तक पहुंचाने वाली रचनाएं हिंदी में विरल हैं। वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने नीलाक्षी सिंह को संवेदनशील लेखिका बताते हुए कहा कि एक बहुत ही तकलीफदेह विषय को उकेरने वाली एक अलग तरह की और श्रेष्ठ कृति है। अमिता पाण्डेय ने कहा कि जब रचना में व्यक्त पीड़ा दूसरों को भी महसूस होने लगे तो उसी रचना की सार्थकता होती है। नीलाक्षी की कृति इस कसौटी पर खरी उतरती है।
निर्णायक मंडल ने पुरुस्कृत पाण्डुलिपि के साथ ही तीन अन्य पाण्डुलिपियों के प्रकाशन की संस्तुति की है, उनमें आधुनिकता और भारतीय समाज : ओमप्रकाश कश्यप, कठपुतलियां : अंजू शर्मा और सिनेमा सप्तक : अनिरुद्ध शर्मा शामिल हैं। इन पुस्तकों को सेतु प्रकाशन जल्द ही प्रकाशित करेगा।
सुनील
