बलिया (हि. स.)। दिल्ली की हवा जहरीली होने के बाद जिले में भी पराली को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। यहां भी पराली जलाना प्रतिबंधित कर दिया गया है। पराली प्रबंधन के लिए कंबाइन हार्वेस्टर मशीन के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
उप कृषि निदेशक इंद्राज ने कहा कि सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाकर कंबाइन से कटाई करने पर फसल अवशेष या धान की पराली जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है, बल्कि कटाई के बाद खेत में मौजूद पर्याप्त नमी का उपयोग कर किसान भाई सुपर सीडर से सीधे अपने खेत की बुवाई करें। इससे बीज व उर्वरक की एक साथ लाइन से बुवाई हो जाएगी। फसल अवशेष भी सुपर सीडर से लगे रोटावेटर से पराली काटकर मिट्टी में मिला दी जाती है, जो शीघ्र ही जैविक खाद बन जाती है। इस प्रकार सुपर सीडर से बुवाई करने से लागत में कमी के साथ-साथ यूरिया की भी बचत होती है।
कहा कि फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने का प्राविधान है, जलाने की घटना सीधे सेटेलाइट से फोटो के माध्यम से पकड़ ली जाती है। जलाने वाले कृषक से प्रतिघटना पांच हजार से 15 हजार तक जुर्माना वसूला जाएगा।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि खेत में पराली अवशेष कदापि न जलाएं। इससे पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ मृदा के सुधार से फसल की पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी। करमौता नवानगर में सुपर सीडर से बुवाई करने वाले कृषक धनंजय कुमार राय ने कहा कि वे कभी भी धान की पराली खेत में नहीं जलाते हैं। यह भी कहा कि सुपर सीडर खेत में उपलब्ध नमी से एक बार में ही गेहूं की बुवाई कर लेता हूं, जिसे बीज और खाद सदी गहराई पर पड़ने से फसल की पैदावार 15 से 20प्रतिशत अधिक होती है तथा फसल अवशेष खेत में मिल जाने से जमीन उपजाऊ बनी रहती है। उन्होंने कहा कि किसान भाई धान की फसल के बाद लागत कम करने हेतु सीधे सुपर सीडर से बुवाई करें तथा जुर्माना देने से बचें।
