नई दिल्ली(हि.स.)। पिछले दो साल से कोरोना महामारी की वजह से मंदी की मार झेल रहे नागरिक उड्डयन उद्योग को एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी विमान के ईंधन की कीमत में हुई जोरदार वृद्धि से जबरदस्त झटका लगा है। विमान के ईंधन की कीमत में हुई बढ़ोतरी के कारण ज्यादातर एयर रूट्स पर उड्डयन कंपनियों को किराये में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में आई उछाल के बाद एयर टरबाइन फ्यूल की कीमत में एक झटके में 18,000 रुपये प्रति किलोलीटर की भारी भरकम बढ़ोतरी कर दी गई है। इस बढ़ोतरी के बाद एटीएफ की कीमत प्रति किलोलीटर 1 लाख रुपये से भी अधिक हो गई है। इसके पहले 1 मार्च को ही एयर टरबाइन फ्यूल की कीमत में प्रति किलोलीटर 3010.87 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
विमान के ईंधन में इस साल छठी बार बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत अभी तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के एयर टरबाइन फ्यूल सेल पूरे देश भर में कोलकाता में सबसे ज्यादा महंगा हो गया है। कोलकाता में इसकी कीमत 1,14,979 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। देश के चार महानगरों की बात करें, तो एटीएफ की कीमत के मामले में दूसरे स्थान पर चेन्नई का स्थान है, जहां विमान के ईंधन की कीमत 1,14,133 रुपये प्रति किलोलीटर, दिल्ली में 1,10,666 रुपये प्रति किलोलीटर और मुंबई में 1,09,119 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग के अनुपात में कम आपूर्ति होने के कारण कच्चे तेल की कीमत में 2021 से ही लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का संकट और ज्यादा बढ़ गया है। इसकी वजह से कच्चा तेल लगातार काफी महंगा होकर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की कीमत में आई उछाल के कारण ही एयर टरबाइन फ्यूल की कीमत में इस साल 6 बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। हालांकि केंद्र सरकार ने कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी के बावजूद लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की कीमत में कोई परिवर्तन नहीं किया है।
एविएशन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक एयर टरबाइन फ्यूल की कीमत में बढ़ोतरी से देश के एविएशन सेक्टर को काफी झटका लगा है। कोरोना महामारी के कारण दो साल तक लगातार नुकसान का सामना करने के बाद एविएशन इंडस्ट्री में इस साल तेजी आने की उम्मीद की जा रही थी। इसी महीने के अंत में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी पहले की तरह नियमित होने वाली हैं। इसी तरह कुछ समय बाद देश में गर्मी की छुट्टियों का सीजन भी शुरू हो जाएगा। जानकारों के मुताबिक एविएशन सेक्टर छुट्टियों के सीजन में अपने 2 साल के कारोबार में हुए नुकसान की भरपाई करने की योजना बना रहा था, लेकिन 2022 में विमान के ईंधन की कीमत में हुई 6 बार की वृद्धि ने एविएशन सेक्टर की तमाम आशाओं पर तुषारापात कर दिया है।
जेट एयरवेज में जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) रह चुके अमित शुक्ला के मुताबिक किसी भी एयरलाइंस के ऑपरेटिंग कॉस्ट में 40 प्रतिशत हिस्सा एयर टरबाइन फ्यूल की कीमत का होता है। इस साल अभी तक एयर टरबाइन फ्यूल की कीमत में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। जिसकी वजह से तमाम एयरलाइंस को भी अपने किराए में भारी भरकम बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, ताकि लागत की वसूली हो सके।
जानकारों के मुताबिक किराए में बढ़ोतरी का असर यात्रियों की संख्या में कमी के रूप में दिखने की आशंका है। क्योंकि इकोनॉमी एयर फेयर होने की वजह से जो मुसाफिर हवाई सफर करना पसंद करते थे, अब किराया बढ़ जाने से वे हवाई सफर से बिदक भी सकते हैं। ज्यादा महंगा किराया होने पर मुसाफिर ट्रेन या बस जैसे यात्रा के दूसरे साधनों की ओर आकृष्ट हो सकते हैं। यही वजह है तमाम विमानन कंपनियां सरकार से विमान के ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रही हैं, ताकि इसकी कीमत नियंत्रित भी रह सके और कंपनियों को एटीएफ की खरीद पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा भी मिल सके। ऐसा होने से विमानन कंपनियों का बोझ कम हो सकेगा। साथ ही उन्हें यात्री किराये को भी नियंत्रित रखने में मदद मिल सकेगी।
योगिता
