– जहां कभी बबूल के कांटें चुभते थे वहां आज फलदार फसल स्वाद, स्वास्थ्य व ग्रामीणों की आमदनी का बन गए साधन
औरैया (हि.स.)। बदलाव के दौर में गुजर रहे बीहड़ में एक बार फिर उम्मीदों के चलते एक सकारात्मक बदलाव हुआ है जिन पगडंडियों पर विलायती बबूल के कांटें चुभते थे, आज वहां फलदार वृक्ष आमजन को स्वाद, स्वास्थ्य और इनकम दे रहें।
यमुना व चम्बल, सिंध, क्वारी, पहूज के बीहड़ में एक समय में जहां डाकुओं की गोली की बोली और परियों की चोली फिल्मी पर्दे पर एक अलग ही छाप छोड़ती थी। लोगों के मन में जहां बीहड़ में विलायती बबूल के कांटे राह चलते पैरों में चुपते थे। आज इस बदलाव के दौर में किसानों की अथक प्रयासों ने नया रंग दिया है। आज कांटों की जगह खुशबूदार संतरा, नींबू, मौसमी, अनार, अमरूद, केला आदि के वृक्ष वातावरण में अपनी अनूठी छाप छोड़ रहे हैं। यह वही इलाका है जहां 1978 में चम्बल घाटी योजना के तहत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने डाकुओं से निपटने के लिए विलायती बबूल का हेलीकॉप्टर द्वारा छिड़काव कराया था। उसके बाद से इस क्षेत्र में वन्यजीवों का कांटों की वजह से लगभग समूल नाश हो गया और क्षेत्र विशेष में लोग कांटों की वजह से आना-जाना भी छोड़ गए।
बीहड़ के आसपास एक सैकड़ा गांवों के लोगों में अपने अस्तित्व को लेकर एक राय बनी, क्यों ना इस इलाकों का विकास स्वयं अपने प्रयासों से किया जाए। परिणाम स्वरूप कई गांवों के किसानों ने इन कांटों के वृक्षों को दरकिनार कर फलदार वृक्षों की ओर रुख किया और आज स्थिति यह है कि क्षेत्र में बागवानी के रूप में कई दर्जन फलदार वृक्षों के भाग क्षेत्र में सृजनात्मकता को बयां कर रहे हैं।
फलदार फसल बनी आमदानी से ग्रामीणों में खुशी
चम्बल के बीहड़ी इलाके में रहने वाले अजय तिवारी ने बताया कि उनकी दो बीघा खेत पर अमरूद, अनार व केला के बाग है। बाग में अब फलदार फसल से अच्छी आमदनी हो जाती है। अजय के मुताबिक कभी इस इलाके में आने से लोग भय खाते थे और आज आलम यह है कि फलदार खेती के जरिए परिवार का पालन पोषण के साथ ही आमदनी का भी जरिया बन गया है। इसी तरह पदम राजपूत के साढ़े पांच एकड़ खेत में मौसमी के बाग हैं। इन दिनों बाग में मौसमी की फसल से आमदानी दोगुनी हो गई है। इसके लिए दोनों ही किसनों ने प्रदेश की योगी सरकार का भी धन्यवाद दिया। किसानों का कहना है कि बीहड़ में आमदानी व फसल प्रोत्साहन योजना के तहत अनुदान का लाभ मिला। अनुदान में मिली रकम से फलदार खेती की और आज आय के साथ-साथ बेहतर फसल की मिसाल इस इलाके के लोगों के लिए नजीर बन गए है।
