Wednesday, March 4, 2026
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ओमिक्राॅन ने फिर तोड़ी बौद्ध सर्किट के पर्यटन की उम्मीद

-विदेशी उड़ान पर रोक से छाई मायूसी

कुशीनगर (हि. स.)। कोविड-19 वायरस के नए वेरियंट ओमिक्राॅन के कारण अंतर-राष्ट्रीय उड़ान टलने से बौद्ध सर्किट के पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में पुनः मायूसी छा गई है।

दरअसल, कुशीनगर अंतर-राष्ट्रीय एयरपोर्ट से घरेलू उड़ान सेवा शुरू हो जाने के बाद विमानन कम्पनियों ने विदेशों से उड़ान शुरू करने की कोशिशें तेज कर दी थी। जिसके बाद बौद्ध सर्किट के पर्यटन के बूम कर जाने की उम्मीद थी। 15 दिसम्बर से अंतर-राष्ट्रीय परिचालन सामान्य होने के बाद उड़ान सेवा शुरू होने की पूरी उम्मीद बंध चुकी थी। किन्तु ओमिक्राॅन के चलते प्रतिबन्ध बढ़ने से पर्यटन उद्योग पुनः मायूस हो गया है।

साल 2019-20 में कुशीनगर एयरपोर्ट से उड़ान की योजना बननी शुरू हुई। किन्तु 24 मार्च 20 को देश भर में लाॅकडाउन लगने के बाद योजना फलीभूत नहीं हो पाई। अक्टूबर 20 में भी पुनः उड़ान की कोशिशें तेज हुई, परन्तु कोविड प्रतिबंधों के कारण कोशिशें व्यर्थ गई। अगस्त माह से कोविड प्रतिबंधों में ढील मिली तो पुनः उड़ान की कोशिशें तेज हुई। 26 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के द्वारा श्रीलंका की उड़ान से एयरपोर्ट का उद्घाटन करने के बाद नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली, मुंबई व कोलकाता से उड़ान की घोषणा की।

अंतर-राष्ट्रीय परिचालन सामान्य होने के बाद खाड़ी व बौद्ध देशों से उड़ान की घोषणा की। सरकार की मंशा के अनुरूप विमानन कम्पनी स्पाइस जेट ने दिल्ली से उड़ान सेवा भी शुरू कर दी। विमानन कम्पनी अंतर-राष्ट्रीय उड़ान की तैयारियों में जुटी थी कि ओमिक्राॅन का संकट खड़ा हो गया। ऐसे में पर्यटन से नित्य जीविका अर्जित करने वाले आर्ट क्राफ्ट, कपड़े, मूर्तियां, माला, टी स्टाल व स्ट्रीट फूड का कार्य करने वाले छोटे मोटे कारोबारी भी परेशान है।

ठप है पर्यटन उद्योग

विदेशी उड़ान बन्द होने के कारण कुशीनगर का पर्यटन उद्योग भी ठप पड़ गया है। कोविड के पूर्व हर साल यहां 85-90 हजार विदेशी पर्यटक आते रहे है। पर्यटकों में चीन, जापान, श्रीलंका, ताइवान, भूटान, नेपाल, इंडोनेशिया, म्यांमार आदि देशों के नागरिक शामिल है। कुशीनगर से सीधे उड़ान सेवा शुरू होने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती। चूंकि कुशीनगर का पर्यटन सीजन अक्टूबर से मार्च तक का है। पर्यटन कारोबारी उम्मीद लिए बैठे थे कि विदेशी उड़ान शुरू होने से चालू सत्र में आंशिक लाभ मिल सकेगा, किन्तु मायूसी हाथ लगी है।

क्या कहते हैं पर्यटन कारोबारी

होटल द रायल रेजीडेंसी के महाप्रबन्धक पंकज सिंह का कहना है कि बौद्ध सर्किट का पर्यटन पूरी तरह बौद्ध देशों पर निर्भर है। जब तक विदेशी पर्यटक नहीं आयेंगे, तब तक होटल इंडस्ट्री की स्थिति सुधरने वाली नहीं है। भंते अशोक का कहना है कि बौद्ध मॉनेस्ट्री में गतिविधियां सामान्य पूजा पाठ तक सिमट कर रह गई है। अनेक सामुदायिक व जनकल्याण की गतिविधियां भी ठप है। बौद्ध भिक्षु नित्य कोविड से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

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