Saturday, March 7, 2026
Homeअन्यएलएचबी कोच से लैस होकर चलेगी अयोध्या कैंट-दिल्ली एक्सप्रेस ट्रेन

एलएचबी कोच से लैस होकर चलेगी अयोध्या कैंट-दिल्ली एक्सप्रेस ट्रेन

लखनऊ (हि.स.)। रेलवे प्रशासन यात्रियों की सुविधा के लिए 14205 अयोध्या कैंट-दिल्ली एक्सप्रेस को एलएचबी (लिंके हॉफमैन) कोच से लैस करके बुधवार से चलाने जा रहा है। यह ट्रेन आज शाम 5:25 बजे अयोध्या कैंट से चलकर रात 08 बजे लखनऊ होकर दिल्ली जाएगी। इस ट्रेन में एलएचबी कोचों के लगने से यात्रियों का सफर अधिक सुरक्षित और आरामदायक हो जाएगा।

रेलवे प्रशासन के मुताबिक, 14205 अयोध्या कैंट-दिल्ली एक्सप्रेस को एलएचबी (लिंके हॉफमैन) कोच से लैस करके चलाया जाएगा। यह ट्रेन बुधवार शाम 5:25 बजे अयोध्या कैंट से चलकर रात 08 बजे लखनऊ होकर दिल्ली सुबह 04:20 बजे पहुंचेगी। वापसी में 14206 दिल्ली-अयोध्या कैंट एक्सप्रेस में 18 दिसम्बर से एलएचबी बोगियां लगाई जाएंगी।

रेलवे बोर्ड ने सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (क्रिस) को परंपरागत बोगियों की जगह एलएचबी रैक की फीडिंग के आदेश दे दिए हैं। दिल्ली-अयोध्या कैंट एक्सप्रेस में एलएचबी बोगियों के लगने से सीटों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़ जाएगी। इससे अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का दर्शन करने आने वाले यात्रियों को वेटिंग से राहत मिलेगी।

एलएचबी कोच में होती हैं अधिक सीटें

एलएचबी रैक वाली ट्रेन 160 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ सकती है। एलएचबी कोचों में सीटों की क्षमता 10 प्रतिशत अधिक रहती है। एसी सेकेंड में 52 सीट, एसी थर्ड में 72 और स्लीपर क्लास में 80 सीटें होती हैं। एलएचबी बोगियों की टेलिस्कोपिक डिजाइन हादसे के समय बोगियों को एक दूसरे के ऊपर चढ़ने से बचाती हैं। इसकी एडवांस डिस्क ब्रेक सिस्टम तेज रफ्तार में भी ट्रेन को नियंत्रित करती है। इसके अलावा परंपरागत बोगियों वाली ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 110 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है।

एलएचबी कोच होते हैं अधिक सुरक्षित और आरामदायक

रेलवे प्रशासन यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर कराने के लिए परंपरागत कोचों की जगह अब एलएचबी कोच चरणबद्ध तरीके से लगा रहा है। एलएचबी कोच से लैस होने पर ट्रेन में दुर्घटना की संभावना कम होती है। दुर्घटना होने के समय कोच एक दूसरे पर नहीं चढ़ते हैं। इससे जानमाल का नुकसान कम होता है। इसके साथ ही एलएचबी कोचों से लैस होने पर ट्रेन में झटके कम लगते हैं और रफ्तार भी बढ़ जाती है। जबकि पुराने परंपरागत (आईसीएफ) कोचों में दुर्घटना के समय काफी नुकसान की संभावना होती है।

दीपक

RELATED ARTICLES

Most Popular