Sunday, April 5, 2026
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 एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट,वाराणसी में बाल विवाह पर लगा अंकुश

चार वर्ष में 39 किशोरियों को बालिका वधू बनने से बचाया गया

वाराणसी (हि.स.)। वाराणसी जिले में बाल विवाह पर काफी तेजी से अंकुश लगा है। नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) -5 की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। वर्ष 2015-16 में आई नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट में 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की शादी का ग्राफ जहां 19.9 था । वहीं 2020-21 में आयी सर्वे-5 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा घटकर 10.4 हो गया। इससे साफ है कि जिले में बाल विवाह पर काफी हद तक लगाम लग चुका है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पाण्डेय ने इस बदलाव का श्रेय प्रदेश सरकार की महिला कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ मिशन शक्ति जैसे अभियानों को दिया है। गुरूवार को उन्होंने कहा कि इन अभियानों की देन है कि बाल विवाह जैसी कुरीति पर कई तरफ से प्रहार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में समाज को तो जागरूक किया जा रहा है । कन्या सुमंगला जैसी योजनाओं की मदद से शिक्षित होकर बेटियां अब खुद भी बाल विवाह के खिलाफ मुखर हो रही है। समाज में आई इस जागरूकता का ही नतीजा है कि बाल विवाह के गुपचुप प्रयास की भी सूचना अब आसानी से मिल जाती है। ऐसी ही सूचनाओं पर की गयी त्वरित कार्रवाई ने ही बाल विवाह पर रोक लगाया है।

उन्होंने दो मामलों का खास तौर पर उल्लेख किया। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि चोलापुर के दानगंज में एक 15 वर्षीय किशोरी के व्याह रचाने की तैयारी पूरी हो चुकी थी। मंदिर में बनाये गये लग्न मण्डप में किशोरी को बस सात फेरे लेने शेष रह गये थे । तभी बाल संरक्षण इकाई व चाइल्ड लाइन की टीम पुलिस के साथ वहां पहुंच गयी। टीम को मंदिर की ओर आता देख दूल्हा और बाराती वहां से भाग निकले। एक गुमनाम सूचना पर हुई इस फौरी कार्रवाई का नतीजा रहा कि वह किशोरी ‘बालिकावधू’ बनने से बाल-बाल बच गयी।

इसी तरह दुर्गाकुण्ड के मलिन बस्ती में 13 वर्षीय किशोरी के विवाह में हल्दी की रस्म हो रही थी। पड़ोस की कुछ जागरूक महिलाओं ने इसकी सूचना टोल फ्री नम्बर 1098 पर दी। सूचना मिलने के फौरन बाद सक्रिय हुई बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन की टीम पुलिस के साथ वहां पहुंची और बाल विवाह को रोकवा दिया।यह दो घटनाएं तो महज एक नजीर हैं।

चार वर्ष में रोका 39 बाल विवाह

जिला बाल संरक्षण इकाई की संरक्षण अधिकारी निरुपमा सिंह बताती है कि जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन, संबंधित थाने की पुलिस तथा स्वयं सेवी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास का नतीजा है कि बीते चार वर्ष में बाल विवाह रोकने के 39 मामलों में सफलता मिली है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में 12, 2020-21 में 10, 2021-22 में 11 व वर्ष 2022-23 में अब तक बाल विवाह की छह कोशिशों को नाकाम किया गया है। बाल विवाह रोकने के बाद उनके अभिभावकों ने बाल कल्याण समिति के समक्ष शपथ पत्र दाखिल किया है कि वह अपने बच्चों की शादी तभी करेंगे जब वह बालिग हो जाएंगे। वह बताती है कि बाल विवाह रोकने भर से हमारा काम खत्म नहीं होता है। कार्रवाई के बाद हम फालोअप भी करते रहते हैं। हम इस बात पर भी नजर रखते हैं कि कहीं ऐसी कोशिश पुनः तो नहीं की जा रही है।

श्रीधर

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