-राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि पिछली बार से भी बढ़ सकती हैं भाजपा की सीटें
लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में बसपा के गिरते ग्राफ की संभावनाओं के बीच भाजपा और सपा की निगाहें बसपा के वोट बैंक को अपनी ओर खिंचने पर लग गयी हैं। इस बीच गुणा-गणित में भाजपा के दिग्गजों के बढ़े जमावड़े से भाजपा को बढ़त दिख रही है। एक सप्ताह से तेजी से बदले माहौल ने भी प्रमुख विपक्षी सपा को पीछे धकेल दिया है। राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो यही स्थिति रहने पर पिछले विधानसभा चुनाव से भी भाजपा की ज्यादा सीटें आ जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं है।
राजनीतिक समीक्षक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि पहले तो सपा के बढ़ते ग्राफ को देखकर ऐसा लग रहा था वह भाजपा को कड़ी टक्कर देगी। वह सरकार बना भी सकने की स्थिति में आ सकती थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ताबड़तोड़ रैलियों और इत्र व्यापारी के यहां करोड़ों की मिली संपत्ति ने लोगों के मनोभाव को बदल दिया है।
वरिष्ठ पत्रकार अनील सिंह राणा का कहना है कि इत्र कारोबारी के यहां पड़े छापे के बाद लोगों में सपा की पुरानी तस्वीर उभरकर सामने आ गयी है। इस कारण लोगों का मनोभाव बदल रहा है। तेजी से आये इस बदलाव में अब भाजपा की एकतरफा जीत दिखने लगी है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार सुनील सिंह का कहना है कि बदलाव काफी हुआ है, लेकिन अभी भाजपा के लिए राह बहुत आसान नहीं है। राजनीति में कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता।
वरिष्ठ पत्रकार सुनील राय का कहना है कि इस बार पहले से ही दिख रहा है कि भाजपा का पलड़ा भारी है, लेकिन इस बीच हुए बदलाव ने लोगों के मनोभाव को और बदल दिया है। माहौल बदलने और किसी पार्टी की स्पष्ट जीत दिखने पर पांच प्रतिशत लोग स्वयं ही जीतने वाली पार्टी की ओर उन्मुख हो जाते हैं।
उपेन्द्र
