– मानक को पूरा नहीं कर पायीं कंपनियां, चार कंपनियों का ग्रेड सी माइनस
लखनऊ (हि.स.)। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा देश की 52 बिजली कंपनियों की रेटिंग में प्रदेश की बिजली की कंपनियां पूरी तरह फेल रहीं। गुजरात व हरियाणा की कंपनियों ने जहां ग्रेडिंग में प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं प्रदेश की पांच कंपनियों में से चार कंपनियां किसी तरह से सी मानइस ग्रेड में स्थान बना पाईं।
प्रदेश की बिजली कंपनियों में वित्तीय और तकनीकी पैरामीटर में भारी गिरावट आयी है, जिससे बिजली निचले पायदान पर लुढक गयी हैं। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कराये गये ग्रेडिंग में केवल एक बिजली केवल एक बिजली कंपनी पश्चिमांचल थर्ड डिवीजन पास हो पायी है। ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा देश की 52 बिजली कम्पनियों की 10 वीं वार्षिक रेटिंग जारी की गयी है, उसमें 100 नम्बर मानकर अलग-अलग ग्रेड दिया गया है।
देश की जिस बिजली कम्पनी को 85 से 100 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘ए प्लस‘‘ होगी, जिसे 65 से 85 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘ए‘‘ ग्रेड में होगी, जिस कम्पनी को 50 से 65 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘बी ‘‘ श्रेणी में होगी, जिस कम्पनी को 35 से 50 नम्बर मिलेंगे वह ‘‘बी माइनस‘‘ श्रेणी में होगी, वहीं 15 से 35 नम्बर पाने वाली कम्पनियां ‘‘सी‘‘ में होंगी और सबसे फिसड्डी 0 से 15 नम्बर पाने वाली कम्पनी ‘‘‘सी माइनस‘‘ ग्रेड में होगी। उ0प्र0 की बिजली कम्पनियों का हाल चिन्ता जनक है।
प्रदेश की बिजली कंपनियों की ग्रेडिंग देखें तो पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम को सी ग्रेड मिला है। इसके अलावा कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कम्पनी (केस्को), मध्यांचल विद्युत वितरण निगम,पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को सी माइनस ग्रेड मिला है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सभी बिजली कम्पनियां पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई हैं। देश में पहले पायदान पर गुजरात हरियाणा व देश के निजी घराने जो ‘‘ए प्लस‘‘ श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। भारत सरकार द्वारा ग्रेडिंग का जो प्रमुख मानक है, उसमें वित्तीय पैरामीटर के अंतर्गत औसत विद्युत लागत व औसत बिलिंग रेट के लिये 55 नम्बर रखा गया है, जहां और इसी प्रकार बिजली खरीद एटीसी हानियों सरकार सपोर्ट अन्य मानकों के लिये भी अलग-अलग नम्बर रखे गये हैं। कुल प्राप्तांक 100 नम्बर का है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उ0प्र0 की बिजली कम्पनियां भारत सरकार द्वारा तय की गयी ग्रेडिंग में पूरी तरह फेल साबित हुई हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि बिजली कम्पनियों यानी डिस्कॉम प्रबंधन प्रदेश की कम्पनियों को आगे बढ़ाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि देश की 20 कम्पनियों को सबसे ज्यादा खराब ग्रेडिंग मिली है, जिसमें 4 कम्पनियां उ0प्र0 की हैं। उ0प्र0 का पावर प्रबन्धन जो सुधार के बड़े-बड़े दावे करता है, अब जब उ0प्र0 की बिजली कम्पनियां पास भी नहीं हो पायी हैं।
उपेन्द्र
