रायबरेली(हि. स.)। रायबरेली को अमेठी से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित रेल लाइन परियोजना को आख़िरकार ग्रहण लग गया। नौ साल के लंबे इंतजार के बाद अब शायद ही यहां के लोगों का यह सपना पूरा हो सकेगा। इस बात के संकेत रेलवे की सर्वे रिपोर्ट में आई है, जिसके अनुसार इस लाइन पर ट्रैफिक लोड बेहद कम रहने की संभावना है, जिससे रेट ऑफ रिटर्न अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिल सकेगा और यह शून्य स्तर पर है।
इसी रिपोर्ट के आधार पर रेलवे बोर्ड में इस महत्वपूर्ण परियोजना का प्रस्ताव पास नहीं हो सका। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने भी इस बात की तस्दीक की है।हालांकि उन्होंने यह आश्वासन जरूर दिया है कि आगे इस परियोजना पर विचार किया जा सकता है और अपेक्षा के अनुरूप रिपोर्ट मिलने पर आगे काम किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि रायबरेली से अमेठी को सीधे रेललाइन से जोड़ने की बात स्व. संजय गांधी के सामने भी आई थी, लेकिन इसपर कोई काम नहीं हो सका। 2013 को इस 66 किमी की महत्वपूर्ण रेललाइन का उद्घाटन आनन-फ़ानन में सांसद राहुल गांधी ने अमेठी में किया था, जिसपर करीब 966 करोड़ की राशि खर्च की जानी थी। हालांकि लोकसभा चुनावों की अधिसूचना जारी होने से इस पर काम नहीं शुरू किया जा सका।
इसी बीच 2014 मे केंद्र की भाजपा सरकार बनने से इस परियोजना पर संकट की बात होने लगी और पांच साल बाद केंद्र की भाजपा सरकार ने जुलाई 2018 में इसके लिए व्यापक सर्वे शुरू किया। इस बीच 2019 में अमेठी की सांसद बनी स्मृति ईरानी ने भी इस परियोजना के जल्द शुरू होने की बात कही थी और उन्होंने इसके लिए अपर गृह सचिव अवनीश अवस्थी व तत्कालीन डीआरएम संजय त्रिपाठी के साथ विशेष बैठक भी की थी। जबकि इस परियोजना पर प्रथम चरण के सर्वे के आगे कोई काम नहीं हो सका। अब रेलवे की इस विशेष सर्वे के आधार पर रेलवे बोर्ड में इस परियोजना को लेकर प्रस्ताव पास नहीं हो सका।
इसकी जानकारी मिलने पर इस क्षेत्र के निवासियों को बहुत निराशा है और उन्हें अभी भी उम्मीद है कि भले ही इंतजार लंबा हो लेकिन यह परियोजना धरातल पर जरूर उतरेगी और उन सबका सपना पूरा हो सकेगा।
