Wednesday, March 4, 2026
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उफनाई यमुना और बेतवा नदियों ने शुरू की तबाही, दर्जनों गांव खाली

– नेशनल हाइवे किनारे पीड़ितों ने डाली चारपाई, शहर के अंदर भी बाढ़ के पानी से मकान ढहे

– चैतन्यदास आश्रम भी बाढ़ के पानी में डूबा, करोड़ों रुपये की लागत के प्रोजेक्ट को लगा झटका

हमीरपुर (हि.स.)। हमीरपुर जिले मेंयमुना और बेतवा समेत कई नदियों के उफनाने से अब यहां हालात बिगडऩे लगे है। शहर से लेकर तटवर्ती गांवों तक बाढ़ से तबाही शुरू हो गई है। सैकड़ों लोग गृहस्थी छोड़कर हाइवे में डेरा डाला है। नदियों में लगातार लाखों क्यूसेक पानी आने से दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से टापू बन गए है। वहीं बड़ी संख्या में मकान भी गिर गए है। हाइवे में डेरा डाले दर्जनों परिवार राहत सामग्री का इंतजार कर रहे है। अभी तक उन तक कोई भी राहत सामग्री नहीं पहुंची है जिससे उनमें आक्रोश देखा जा रहा है।

हमीरपुर शहर यमुना और बेतवा नदियों के बीच बसा है। करीब दस किमी की लम्बाई और एक किमी की चौड़ाई में बसा शहर और कई गांव, मजरे इस समय बाढ़ का दंश झेल रहे है। कोटा बैराज और चंबल नदी से 22 लाख क्यूसेक पानी पास किए जाने से यहां यमुना नदी खतरे के निशान से तीन मीटर व बेतवा नदी दो मीटर पार हो गई है। दोनों नदियों के उफनाने से शहर के डिग्गी, भोला का डेरा, चूरामन का डेरा, मेरापुर, भिलांवा, रामराजा का डेरा, चन्दुलीतीर, ब्रम्हा का डेरा सहित कई गांव और मजरे में बाढ़ का पानी भर गया है जबकि शहर के अंदर पुराना जमुना घाट, बेतवा घाट, गांधी नगर गौरादेवी, कालपी चौराहा, वन विभाग व हाथी दरवाजा के निचले रिहायशी इलाके बाढ़ के पानी से डूब चुके है। बेतवा नदी की बाढ़ से तो अमिरता, चन्दुलीतीर, कलौलीतीर, कुछेछा राठ तिराहा, पारा ओझी व कुंडौरा समेत कई गांव प्रभावित हुए है। बड़ी संख्या में मकान भी बाढ़ के पानी में ढह गए है। चारपाई और ठिलिया में लोगों ने गृहस्थी रखकर हाइवे किनारे डेरा डाला है।

उधर, केन नदी की बाढ़ की जद में मौदहा क्षेत्र के तमाम गांव आ गए है। वहीं दर्जनों गांव बाढ़ के पानी से चारो ओर से घिर चुके है। यहां के बता दे कि जलशक्ति मंत्री डाॅ महेन्द्र सिंह ने कल शाम यहां बाढ़ग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर समीक्षा बैठक की थी। उन्होंने बताया था कि चंबल से 22 लाख क्यूसेक पानी आने से बाढ़ के हालात बने है जिसके लिए हर स्तर पर तैयारी की गई है।

यमुना नदी की बाढ़ से करोड़ों रुपये की लागत के प्रोजेक्ट को लगा झटका

हमीरपुर शहर से सटे भिलांवा गांव में यमुना नदी किनारे चौतन्य आश्रम बना है। यहां कुछ साल पहले प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या आए थे। उन्होंने कटान से आश्रम को बचाने के लिए बड़ी योजना की सौगात दी थी। जलशक्ति मंत्री डाॅ महेन्द्र सिंह ने यमुना नदी किनारे तटबंध को सुरक्षित कराने के लिए करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों का शुभारंभ कराया था। कई करोड़ की लागत निर्माण कार्यों में खर्च भी हो गई है लेकिन बाढ़ से इसे बचाया नहीं जा सका। यमुना नदी की उफान से आश्रम के अंदर कई फीट तक पानी भर गया है। वहीं तमाम घर भी कटान से गिर गए है।

बाढ़ का पानी घुसने से हजारों ग्रामीण अपने ही गांव में हुए कैद

शहर से जुड़े ब्रम्हा का डेरा गांव में यमुना नदी की उफना से बाढ़ का पानी चारो और भर गया है। गांव में हजारों लोगों का गांव से हमीरपुर आना जाना मुश्किल हो गया है। गांव के बाहर नावें चल रही है। इधर शहर के अंदर कई मुहल्लों के अंदर भी नावें चल रही है। बेतवा और यमुना की बाढ़ से सैकड़ों लोगों के घरों के अंदर पानी भर चुका है। गृहस्थी छोड़कर तमाम लोग जान बचाकर भागे वहीं कई ऐसे भी इलाके है जहां कटान से कच्चे मकान नदी में जमींदोज हो गए है। कुरारा क्षेत्र के तमाम गांव भी बाढ़ की जद में आ गए है। नदियों की बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें जलमग्न हो चुकी है।

चौबीस घंटे से बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिली राहत सामग्री

हमीरपुर शहर के डिग्री मुहाल में बाढ़ का पानी भर जाने से दो दर्जन लोग रात में ही गृहस्थी समेट कर बेतवा पुल के पास हाइवे किनारे डेरा डाला है। कमला, मालती, कालीदीन, रामबहादुर, फूल सिंह व सतेन्द्र कुमार समेत तमाम पीड़ितों ने बताया कि बाढ़ के पानी से मकान पूरी तरह से डूब गए है। जान बचाकर सड़क किनारे डेरा डाला लेकिन अभी तक राहत सामग्री नहीं मिली है। बच्चे भूखे है। बताया कि सुबह से कुछ भी खाने को नहीं मिला है। थोड़ी देर पहले पानी का टैंकर जरूर भिजवाया गया है। राठ तिराहे के पास भी सड़क पर एक दर्जन से अधिक बाढ़ पीड़ित डेरा डाले है जिन्हें मदद नहीं मिली।

ढाई दशक के रिकार्ड तोडऩे के मुहाने पहुंच रही नदियां

मौदहा बांध निर्माण खंड के सहायक अभियंता ने रविवार को दोपहर बताया कि इस समय दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। यमुना खतरे के निशान से तीन मीटर पार कर 106.700मीटर ऊपर बह रही है वहीं बेतवा नदी भी लाल निशान पार कर 106.200 मीटर ऊपर बह रही है। बताया कि चंबल से लाखों क्यूसेक पानी यमुना नदी में पास हो रहा है। माता टीला डैम से भी 3.70 लाख क्यूसेक पानी बेतवा नदी में डिस्चार्ज हो रहा है। बता दे कि वर्ष 2013 में यमुना नदी का जलस्तर 106.100 मीटर तथा बेतवा का जलस्तर 106.080मीटर हो गया था। जबकि 1986 में यमुना 107.110 व बेतवा 106.500 मीटर ऊपर बह रही थी।

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