Wednesday, March 4, 2026
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उप्र : हाथरस की घटना ने उप चुनाव के लिए विपक्ष को दी ऊर्जा

लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा की आठ सीटों पर होने वाले उप चुनाव के बीच हाथरस की घटना ने विपक्ष को बड़ा मुद्दा दे दिया है। इस चुनाव को देखते हुए विपक्ष भी हाथरस मुद्दे को गरम किये रहने में लगा हुआ है। इस बीच प्रदेश सरकार की कुछ गलतियां और प्रशासन द्वारा उसे दबाने की नाकाम कोशिशों ने भी तमाम अपराध पर नियत्रंण पाने की कोशिशों व जनता में सख्त संदेश पर पानी फिर गया है। ऐसे में सपा और भाजपा के पास तो खोने के लिए है, लेकिन बसपा व कांग्रेस के पास कुछ खोने के लिए कुछ भी नहीं है।

प्रदेश की आठ विधानसभा के होने वाले उप चुनाव में दो रामपुर की स्वार और जौनपुर की मल्हनी सीट समाजवादी पार्टी के कब्जे में थीं। शेष सभी विधानसभा सीटें भाजपा के कब्जे में थीं। इस बीच बसपा ने भी उप चुनाव में दांव आजमाने के फरमान के साथ ही चुनावी संग्राम को दिलचस्प बना दिया है। भाजपा की नजर आजम खां के बेटे की विधायकी कोर्ट द्वारा अवैध घोषित किये जाने के बाद स्वार सीट पर लगी हुई है। इसके साथ ही जौनपुर की मल्हनी सीट को भी अपने कब्जे में लेने के लिए जी-जान से लगी हुई है। भाजपा संगठन एक-एक बूथ की समीक्षा कर रहा है।

इसी बीच हुई हाथरस की घटना ने सरकार की छवि को खराब किया है। अब संगठन का पूरा जोर उसकी भारपाई पर होगा। इसके लिए उसकी कोशिश होगी कि ताबड़तोड़ बड़े अपराधियों पर चल रही कार्रवाई को और तेज किया जाय, जिससे आम जन मानस में छवि को सुधारा जा सके। इधर विपक्ष इस कोशिश में लगा है कि किसी भी तरह हाथरस घटना को उप चुनाव तक जिंदा रखा जाय। इसको चुनावी कार्यक्रम में भी विपक्ष जोरशोर से उठाएगा।

उधर बसपा प्रमुख मायावती की छवि आमजनमानस में कड़क शासक के रूप में रही है। इस कारण बसपा को दिख रहा है कि हाथरस घटना में रैली-विरोध आदि न करने के बावजूद जनता का झुकाव उसकी ओर होगा। 

इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि हाथरस की घटना ने भाजपा की छवि जरूर खराब की है। अब इसके काट के लिए भाजपा कितनी त्वरित गति से अपराधियों के खिलाफ प्रदेश में कड़ाई से कार्रवाई को अमली-जामा पहनाती है। इस पर उसकी छवि के सुधार निर्भर करेगा।

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