नई दिल्ली (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वो दो हफ्ते के अंदर चित्रकूट जेल में हुई हत्याओं की जांच रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराए। चीफ जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई नवंबर के अंतिम सप्ताह में होगी।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि पुलिस की क्रास फायरिंग में तीन कैदियों की मौत हुई, जिसकी जांच भी यूपी सरकार ने कराई। उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि आप इस मामले पर प्रोटेस्ट पेटिशन फ़ाइल कर सकते हैं लेकिन वो भी तब जब आप तीसरे पक्ष नहीं हों। इस पर याचिकाकर्ता अनूप प्रकाश अवस्थी की ओर से पेश वकील ने यूपी के मुख्यमंत्री का विधानसभा में एनकाउंटर को लेकर दिए गए बयान का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की हिंसा की नीति रोकी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उस न्यायिक जांच में कई तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसमें उन तीनों की मौत हुई है। वह फर्जी एनकाउंटर था। इसलिए स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में हुई जांच में साफ हुआ है कि चित्रकूट एनकाउंटर में मारे गए अपराधी ही थे और उन पर कई आपराधिक मामले पहले से ही चल रहे थे।
कोर्ट ने 10 अक्टूबर को यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने चित्रकूट हत्याकांड की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा था कि विधानसभा में ही राजनीतिक नेता कहते हैं कि अपराधी ठोक दिए जाएंगे। चीफ जस्टिस ने यूपी सरकार से पूछा था कि क्या मामले में कोई जांच हुई है। यूपी सरकार की ओर वरिष्ठ मुकुल रोहतगी ने कहा था कि जांच आयोग अधिनियम के तहत जज की नियुक्ति की गई और विधानसभा में रिपोर्ट पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ जेल अधिकारी और अन्य को दोषी पाए गए और विभागीय कार्यवाही भी हुई है।
वकील अनूप प्रकाश अवस्थी ने दायर याचिका में चित्रकूट जेल में 2021 में हुई तीन विचाराधीन कैदियों की हत्याओं और यूपी में 18 मार्च, 2017 के बाद हुए सभी एनकाउंटर की जांच सीबीआई या एनआईए से कराने की मांग की है। याचिका में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर एनकाउंटर को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। याचिका में यूपी के मुख्यमंत्री के यूपी विधानसभा में की गई उस घोषणा का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि अपराधियों को ठोक दिया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि ये संविधान की धारा 21 का उल्लंघन है।
याचिका में बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी और 2020 में विकास दुबे की मुठभेड़ का हवाला देते हुए कहा गया है कि जेल में हत्याएं और मुठभेड़ की वर्तमान घटना कोई छिटपुट घटना नहीं है। ये घटनाएं न केवल चिंताजनक है बल्कि परेशान करने वाली हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो सरकारी एजेंसी किसी भी नागरिक की जान कभी भी ले सकती है।
संजय
