Sunday, March 15, 2026
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उप्र विधानसभा बजट स़त्र : 65 घंटे 31 मिनट चली सदन की कार्यवाही

-दस दिन की बैठक में पारित हुए कुल 18 विधेयक 

लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में कुल 65 घंटे 31 मिनट सदन की कार्यवाही चली। इस दौरान कुल 18 विधेयक पारित हुए। विधानसभा अध्यक्ष, हृदय नारायण दीक्षित ने गुरुवार को सत्र की समाप्ति पर सदन के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया है। 
विधानसभा का बजट सत्र 18 फरवरी को शुरु हुआ था। अध्यक्ष श्री दीक्षित के अनुसार ने विधानसभा की कार्यवाही 18 फरवरी से प्रारम्भ हुई और चार मार्च तक चली। इन 15 दिनों के सत्र में कुल 10 दिन सदन की बैठकें हुईं, जिसमें कुल 65 घण्टे 31 मिनट सदन की कार्यवाही चली। 
उन्होंने बताया कि 10 दिन के उपवेशनों में अल्पसूचित प्रश्न-192, तारांकित प्रश्न-1301, अतरांकित प्रश्न-1671 प्राप्त हुए। इनमें 1311 प्रश्न उत्तरित हुए। नियम-301 की कुल 377 सूचनाएं प्राप्त हुई जिनमें से 257 स्वीकृत हुई। नियम-51 के अन्तर्गत 680 सूचनाएं प्राप्त हुई जिनमें 364 सूचनाएं स्वीकृत हुई और 316 सूचनाओं पर ध्यानाकर्षण किया गया। 
श्री दीक्षित ने आगे बताया कि सत्र के दौरान नियम-56 के अन्तर्गत 39 सूचनाएं प्राप्त हुई जिनमें 11 सूचनाएं ग्राह्यता हेतु सुनी गयी और 19 पर ध्यानाकर्षण हुआ और अन्य सूचनाओं को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु सरकार को प्रेषित किया गया। उन्होंने बताया कि इस सत्र में 1851 याचिकाएं प्राप्त हुई जिनमें से 1587 ग्राह्य होकर सदन में प्रस्तुत की गयी। 
उन्होंने बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण पर मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष एवं दलीय नेताओं समेत 48 सदस्यों ने भाग लिया। वित्तीय वर्ष 2021-22 की बजट चर्चा में मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष एवं दलीय नेताओं सहित 116 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस बजट सत्र में कुल 18 विधेयक पारित किए गये। जिनमें पक्ष विपक्ष की तरफ से महत्वपूर्ण चर्चाएं हुई। विपक्ष द्वारा अपनी मांग उठाकर तर्क प्रस्तुत किये। संसदीय कार्य मंत्री, सुरेश कुमार खन्ना जी ने उठाये गयं प्रश्नों पर समाधान परक उत्तर दिये।  विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र की समाप्ति पर सदन के सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि सभी दलीय नेताओं और सदस्यों ने सारगर्भित चर्चा में भाग लिया। कार्यवाही की गुणवत्ता की प्रशंसा करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि कार्यवाही में समयावधि ही महत्वपूर्ण नहीं होती है, बहस की गुणवत्ता और मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श की महत्ता से ही कार्यवाही का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। 
उन्होंने कहा कि इस सत्र की सबसे बड़ी यह विशेषता रही कि इस बार सदन की कार्यवाही बड़ी ही शांतिपूर्ण ढंग से और सुचारू रूप से चली। पक्ष विपक्ष की ओर से बहसें हुई। व्यवधान न के बराबर रहा। पक्ष विपक्ष का सदन के संचालन में अप्रतिम योगदान रहा।
अध्यक्ष ने कहा कि संसदीय जनतंत्र दुनिया की आकर्षक व्यवस्था है, जहां दुनिया में अनेकों स्थानों पर संसदीय जनतंत्र मांग के लिए आन्दोलन हो रहे है। हमारे यहां जनतंत्र लम्बे समय से चल रहा है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के नाते यहां की जो परंपराएं हम विकसित करते है। उस पर अन्य विधान मण्डलों की निगाह रहती है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था के प्रश्न पर भी विधानसभा में कई बार महत्वपूर्ण वाद-विवाद हुआ। बेशक, विपक्ष के अपने आंकड़े और तथ्य रहे हैं ओर सरकार के अपने, लेकिन वाद-विवाद में सभा की रूचि और गम्भीरता आकर्षण का विषय बनी रही। सभा में किसानों की समस्यायें भी पूरी गम्भीरता के साथ उठायी गयी। छुट्टे जानवरों की समस्या, गन्ना किसानों की समस्या को दूर करने की दृष्टि से विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही गम्भीर दिखायी पड़े। विद्युत, कृषि, प्रशासन, जल आपूर्ति सहित अविलम्बनीय महत्व के तमाम प्रश्नों पर विधान सभा में गम्भीर वाद-विवाद हुआ।
श्री दीक्षित ने तमाम व्यस्तताओं के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सदन में उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्यपाल अभिभाषण एवं बजट की चर्चा में उपस्थित होकर सदन में उठाये गये विषयों पर अपना विस्तृत उत्तर भाषण दिये। इसके अतिरिक्त भी समय-समय पर सदन के तमाम महत्वपूर्ण उठने वाले विषयों पर हस्तक्षेप करते हुए सदन की आशंकाओं का समाधान किया। विशेषकर किसानों के पक्ष में भारत सरकार द्वारा लाये गये बिल के बारे में विस्तार से चर्चा कर स्थिति स्पष्ट की।
अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी, नेता बहुजन समाज पार्टी, लाल जी वर्मा, नेता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, आराधना मिश्रा ‘मोना’ व नेता अपना दल नील रतन पटेल की अस्वस्थता के कारण श्रीमती लीना तिवारी एवं सुहेल देव पार्टी के नेता सहित सभी दलीय नेताओं की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष निरंतर सदन में मौजूद रहे। अधिकांश उठने वाले मुद्दों पर हस्तक्षेप करते हुए बड़े ही महत्वपूर्ण एवं सामायिक सुझाव दिए। उससे सदन के सदस्यों का ज्ञानवर्धन हुआ। नेता बहुजन समाज पार्टी लाल जी वर्मा ने महत्वपवूर्ण विषयों पर अपनी विशेष रूचि के साथ अधिकांश समय सदन में मौजूद रहे। प्रत्येक मुद्दों पर अपने बौद्विक ज्ञान से समस्याओं के कारगर हल के लिए सरकार को सुझाव दिए। कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ के दलीय नेता के रूप में मुद्दों को बहुत ही शालिनतापूर्वक एवं कारगर ढंग से उठाने की प्रशंसा की। इसके अतिरिक्त अन्य दलीय नेताओं को प्रभावकारी ढंग से मुद्दे को उठाने के प्रति प्रशंसा भाव व्यक्त किया।
अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री, सुरेश कुमार खन्ना द्वारा विपक्ष से उठाये गये 56, 51, 301 सहित अनेक प्रकार की सूचनाओं और बिलों के पारण की बहसों पर उत्तर देकर अपना महत्वपूर्ण योगदान करने के लिए भूरि-भूरि प्रशंसा की। मंत्रिमण्डल के सभी सदस्यों को सरकार की ओर से विशेष प्रकार के प्रश्नों और वाद-विवाद के मामलें में सदन के सदस्यों को अपने उत्तर से संतुष्ट किया। इसके लिए भी धन्यवाद ज्ञापित किया। अध्यक्ष ने विधाान सभा के प्रमुख सचिव, प्रदीप कुमार दुबे एवं विधानसभा व शासन के सभी अधिकारियों और अन्य कर्मियों को सदन संचालन में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। 

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