कानपुर(हि.स.)। उत्तर प्रदेश पुलिस के दामन में दाग लगाने वाले नशेड़ी सिपाहियों की मेडिकल रिपोर्ट में अल्कोहल की पुष्टि हो गई। महिला के आरोप लगाने के बाद दो सिपाहियों को निलंबित कर दिए गए हैं। पीड़िता का आरोप है कि उसे आरोप वापस लेने के लिए रुपयों का भी लालच दिया जा रहा है।
नौबस्ता थाना क्षेत्र में घर में घुसकर बदनीयती से महिला को खींचने और अश्लील हरकतें करने वाले हेड कांस्टेबल हरिओम सिंह और सुशांत को घटना के बाद ही हिरासत में ले लिया गया था। चूंकि मुकदमें की सभी धाराओं में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है, इसलिए दोनों को थाने से ही जमानत दे दी गई।
वारदात का विवरण
मारपीट की सूचना पर मंगलवार रात नौबस्ता के एक घर में पीआरवी वैन में तैनात मुख्य आरक्षी हरिओम और सुशांत जबरन घुस गए थे। शिकायतकर्ता ने बताया कि घर से करीब 100 मीटर दूरी पर उसकी मां टट्टर में सब्जी की दुकान लगती हैं। मंगलवार रात वहां तीन-चार नशेबाजों ने उनसे अभद्रता और मारपीट की तो उसने यूपी-112 पर शिकायत की। पुलिस के पहुंचने तक नशेबाज भाग चुके थे। पूछताछ करने के बाद दोनों सामने वाले टट्टर के अंदर घुस गए और वहां मौजूद महिला से गलत हरकत कीं।
महिला हंगामा करते हुए बाहर निकली तो भीड़ जमा हो गई। भीड़ बढ़ने पर दोनों सिपाही भाग निकले थे। इसके बाद पीड़िता ने नौबस्ता थाने में दोनों सिपाहियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने दोनों का मेडिकल कराया तो शराब पीने की पुष्टि भी हुई। पीड़िता का भी मेडिकल कराया गया है। पीड़िता का आरोप है कि हरिओम गलत नीयत से ही घर में घुसा था, वरना पति को बाहर क्यों करता। जब वह उससे बचकर भागी तो करीब 30 मीटर तक पीछाकर पकड़ने का भी प्रयास किया था।
हनुमंत विहार थाना प्रभारी अभिलाष मिश्रा ने बताया कि पीआरवी 0393 उनके थाना क्षेत्र की है, लेकिन मंगलवार रात जब शिकायत आई तो सबसे नजदीक उसी पीआरवी के होने के चलते वह नौबस्ता थाना क्षेत्र के घटनास्थल पर पहुंच गई। वहीं, नौबस्ता थाना प्रभारी संजय कुमार पांडेय कहना है कि सिपाहियों पर जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज है, उसमें गिरफ्तारी नहीं है, इसीलिए थाने से ही जमानत दे दी गई थी। पीआरवी वहां क्यों पहुंची, जबकि उनका कोई शेड्यूल नहीं था। सिपाही दोषी हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी की धारा नहीं है।
राम बहादुर
