– शासन ने मामले का लिया संज्ञान, संबंधित पुलिस अधीक्षक देंगे जांच रिपोर्ट
कानपुर, 07 सितम्बर (हि.स.)। रोगों की सटीक जानकारी के लिए चिकित्सक तकनीकी जांचों का सहारा लेते हैं, ताकि मरीज को बेहतर इलाज मिल सके। ऐसे में अगर तकनीकी जांच ही गड़बड़ हो जाए तो मरीज की जान पर भी आ सकती है। यह सच्चाई है, लेकिन कानपुर का करिश्माई डा. एडिश पर्सीवल जेम्स क्लीफर्ड दस्तावेजों में 22 जनपदों के 28 अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर कार्य कर रहा है, जो संभव नहीं है। इससे इस बात को बल मिल रहा है कि संबंधित अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर कानपुर के डा. एडिश की जगह कोई दूसरा जांच के नाम पर मरीजों से खिलवाड़ करता होगा। हालांकि शासन ने मामले का संज्ञान लिया है और डा. एडिश सहित सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के मालिकों को समन जारी किया है। इसके साथ ही संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व पुलिस अधीक्षकों को भी पत्र जारी कर जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
पुलिस अधीक्षकों से मांगी गई रिपोर्ट
एक ही डाक्टर के नाम पर संचालित 28 अल्ट्रासाउंड सेंटरों के मामले में महानिदेशक परिवार कल्याण ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने संबंधित 22 जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों व पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी कर जांच रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही 28 सेंटरों के मालिकों और मास्टर माइंड डा. एडिश को समन जारी किया गया है।
डा. एडिश को किया गया तलब
महानिदेशक परिवार कल्याण ने समन जारी करते हुए डा. एडिश को तलब किया है। डा. एडिश को अपना पक्ष महानिदेशक परिवार कल्याण के यहां 15 सितम्बर को रखना है। अगर इस दिन डा. एडिश अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचते तो उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है।
तीन महीने की हो सकती है कारावास की सजा
महानिदेशक परिवार कल्याण ने समन जारी करते हुए कहा कि डा. एडिश अपने सभी दस्तावेज लेकर कार्यालय में पहुंचकर स्पष्टीकरण दें। अगर स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता तो पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 की धारा-25 का उल्लंघन माना जाएगा। इसके तहत प्रति दिन 1000 रुपये की सजा और तीन महीने की अवधि के लिए कारावास की सजा दी जा सकती है।
इन सेंटरों पर जांच कर रहा डा. एडिश
महानिदेशक के पत्र के अनुसार डा. एडिश एमबीबीएस एमडी रेडियोलॉजी हैं। इसके साथ ही पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट/सोनोलॉजिस्ट भी हैं। इनकी डिग्री के जरिये संजीवनी अल्ट्रासाउंड सेंटर आजमगढ़, अपोलो डायग्नोस्टिक सेंटर बाराबंकी, एसजेड जनता डायग्नोस्टिक सेंटर बरेली, चौधरी डायग्नोस्टिक सेंटर बुलंदशहर, अंगद डायग्नोस्टिक सेंटर चित्रकूट, सिटी अल्ट्रासाउंड सेंटर इटावा, केपी सिंह अस्पताल (अल्ट्रासाउंड) फर्रुखाबाद, बालाजी डायग्नोस्टिक सेंटर फतेहपुर, परिवर्तन मिशन अस्पताल और अल्ट्रासाउंड फर्रुखाबाद, न्यू लाइफ लाइन मेडिकल डायग्नोस्टिक सेंटर गोरखपुर, एडवांस डायग्नोस्टिक सेंटर गोंडा, मेडिटेक डायग्नोस्टिक सेंटर गाजीपुर, पायनियर डायग्नोस्टिक सेंटर हमीरपुर, द पनेसिया मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल कानपुर सिटी, एडवांस डायग्नोस्टिक सेंटर कानपुर सिटी, रतन एमआरआई और स्पाइरल सीटी सेंटर कानपुर सिटी, स्नेह पैथोलॉजी एक्स-रे ब्लड बैंक अल्ट्रासाउंड कानपुर सिटी, जीवन डायग्नोस्टिक कन्नौज, अपोलो डायग्नोस्टिक सेंटर लखीमपुर खीरी, बॉडी केयर डायग्नोस्टिक सेंटर महाराजगंज, बालाजी अल्ट्रासाउंड सेंटर मैनपुरी, शिवप्रिया अल्ट्रासाउंड सेंटर मैनपुरी, ज्योति अस्पताल मिर्जापुर, आरएस डायग्नोस्टिक सेंटर मिर्जापुर, पारस डायग्नोस्टिक सेंटर महोबा, 107907 व 109230 एसएमएल अल्ट्रासाउंड सेंटर सीतापुर, सुषमा डायग्नोस्टिक सेंटर श्रावस्ती, न्यू हंस डायग्नोस्टिक सेंटर वाराणसी संचालित हो रहे हैं।
शासन को दूंगा जवाब
महानिदेश परिवार कल्याण द्वारा भेजे गये समन को लेकर डा. एडिश से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। डा. एडिश ने कहा कि क्या सही है क्या गलत है इस पर मीडिया के जरिये मैं कुछ भी नहीं कहना चाहता। शासन ने पत्राचार किया है और शासन को ही जवाब दूंगा।
पत्र का इंतजार
अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. गिरीश मिश्रा ने कहा कि महानिदेशक परिवार कल्याण ने अभी संबंधित डाक्टर और अल्ट्रासाउंड सेंटरो के साथ पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजा है। स्वास्थ्य विभाग में अभी पत्र नहीं आया है, पत्र आने के बाद जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
