Sunday, February 15, 2026
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उप्र: अब दिया जायेगा वाजपेयी के नाम पर पांच लाख रुपये का साहित्य सम्मान

 उप्र हिंदी संस्थान ने शुरू किया पुरस्कार- पुरस्कारों की धन राशि में भारी वृद्धि 
गोरखपुर (हि.स.)। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने साहित्य एवं साहित्यकारों का मान बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पुरस्कारों की धनराशि में भारी वृद्धि किया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में अटल बिहारी वाजपेयी साहित्य सम्मान नाम का नया पुरस्कार भी शुरू किया है।
इसे साहित्य एवं संस्कृति के संरक्षण के क्षेत्र और हिन्दी  साहित्यकारों का मान बढ़ाने की दिशा में योगी सरकार की उपलब्धि बताई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में यह दूसरी बार है, जब हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में पुरस्कारों की संख्या और पुरस्कार की धनराशि में बढ़ोत्तरी की गई है। 
पुरस्कारों की संख्या 22 हुईउत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने इस वर्ष से पुरस्कारों की संख्या 21 से बढ़ा कर 22 कर दी है। अटल बिहारी वाजपेयी की याद में शुरू नया पुरस्कार 05 लाख रुपये का होगा। संस्थान ने प्रचलित पुरस्कारों की धनराशि में भी 50 हजार से लेकर 03 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे राज्य सरकार के खजाने पर 37 लाख 50 हजार रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आया है।
पुरस्कारों पर खर्च होने वाली धनराशि का बोझ बढ़ापूर्व में 21 पुरस्कारों के लिए 01 करोड़ 25 लाख रुपये की धनराशि खर्च होती थी, लेकिन अब खर्च होने वाली इस धनराशि में इजाफा हो गया है। 22 पुरस्कारों के लिए अब 01 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपये खर्च होगी।
भारत भारती सम्मान में सर्वाधिक वृद्धि सबसे अधिक वृद्धि भारत भारती सम्मान की धनराशि में हुई है। इस पुरस्कार की धनराशि 05 लाख से बढ़ाकर 08 लाख कर दी गई है।  हिंदी गौरव सम्मान, लोहिया साहित्य सम्मान, महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, पं. दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, अवंतीबाई साहित्य सम्मान व राजर्षि टण्डन सम्मान के लिए पुरस्कार राशि 04 लाख रुपये से बढ़कर 05 लाख और 13 अन्य पुरस्कारों की धनराशि 02 लाख से बढ़ाकर 2.50 लाख की गई है। इन पुरस्कारों में साहित्य भूषण सम्मान 20 साहित्यकारों को, हिंदी विदेश प्रसार सम्मान 02, सौहार्द सम्मान 15 और विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान 02 लोगों को मिलता है।
इन पुरस्कारों के लिए इतनी निर्धारित हुई धनराशि
पुरस्कार – पूर्व की धनराशि – नई धनराशि भारत भारती सम्मान -5 लाख -8 लाख हिंदी गौरव सम्मान-4 लाख-5 लाख लोहिया साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाख महात्मा गांधी साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाखपं दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाखअवंतीबाई साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाखराजर्षि टण्डन सम्मान-4 लाख-5 लाख साहित्य भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख लोक भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख कला भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख विद्या भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख विज्ञान भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख पत्रकारिता भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाखप्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाखहिंदी विदेश प्रसार सम्मान-2 लाख-2.5 लाखबाल साहित्य भारती सम्मान-2 लाख-2.5 लाखमधु लिमये साहित्य सम्मान-2 लाख-2.5 लाखपं श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान-2 लाख-2.5 लाखविधि भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख सौहार्द सम्मान-2 लाख-2.5 लाख विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान-2 लाख-2 लाख
हिन्दी साहित्य संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ सदानंद गुप्त का कहना है कि ‘‘सीएम योगी आदित्यनाथ का कला एवं साहित्य के प्रति अनुराग, साहित्यकारों के प्रति उनका सम्मान और सहृदयता किसी से छुपी नहीं है। वे पदने संस्थान के मुखिया भी है। उन्होंने कार्यकाल में दो बार न केवल पुरस्कार की संख्या बढ़ाई, पुरस्कार की धनराशि में इजाफा भी किया। संस्थान की ओर से दिए एक प्रस्ताव पर विचार करते हुए नए पुरस्कार भी शुरू किए। यह साहित्य एवं साहित्यकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ही है।

साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी का कहना है कि ‘‘साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के लिए सरकार के इस प्रयासों की सराहना करनी चाहिए। ऐसे पुरस्कार इन क्षेत्रों में कर्म कर रहे लोगों को और कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। उनके मन में यह भाव भी रहता है कि वे साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में अच्छा कार्य करेंगे तो उन्हें भी ऐसे पुरस्कार मिलेंगे। मुख्यमंत्री की यह पहल स्वागत योग्य है।’’

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