Thursday, March 26, 2026
Homeउत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश चुनाव में एक बार फिर से चर्चा में आयी मेट्रो...

उत्तर प्रदेश चुनाव में एक बार फिर से चर्चा में आयी मेट्रो ट्रेन

लखनऊ(हि.स.)। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के दौरान प्रचार के अंतिम दौर में एक बार फिर से मेट्रो ट्रेन चर्चा में आयी। मेट्रो की प्रदेश में शुरुआत कराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेट्रो को प्रचार का माध्यम बनाया है। इसके जरिए अखिलेश अपने कार्यकाल में कराए कार्यों को निकाय चुनाव में जनता को बताकर पार्टी उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे।

उत्तर प्रदेश में 2012 से 2017 के बीच अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और इसी दौरान वर्ष 2014 में उन्होंने राजधानी लखनऊ में मेट्रो का शिलान्यास किया था। मेट्रो के आने की सूचना से प्रदेश के नामचीन राजनीतिक लोगों ने अपनी बातों को जनता के समक्ष रखते हुए इस मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी। मेट्रो का नक्शा बनाने, उसे जमीन पर उतारने के लिए देश के जाने माने अभियंताओं की टीम को लगाया गया। शिलान्यास के दो वर्ष बाद 2016 में मेट्रो ट्रायल भी हुआ। बावजूद मेट्रो ट्रेन की रफ्तार अभी पकड़ भी नहीं पायी थी कि वर्ष 2017 में अखिलेश यादव की पार्टी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा और सत्ता से बाहर हो गए।

उत्तर प्रदेश के लोकसभा चुनाव वर्ष 2019 में एक बार फिर से अखिलेश यादव ने अपने भाषणों में मेट्रो ट्रेन की चर्चा की। विकास के अपने कार्यों को बताते हुए मेट्रो ट्रेन को उसमें बार-बार जोड़ा। जनता में विश्वास जताने की कोशिश की। लेकिन लखनऊ की मेट्रो ट्रेन के चुनावी मुद्दा बनने के बाद भी भाजपा के उम्मीदवार को समाजवादी पार्टी पीछे नहीं कर सके। लक्ष्य में ज्यादा सीटें जीतने की थी लेकिन रणनीति में कमी के चलते हार के साथ निराशा ही हाथ लगी।

वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश में फिर से विधानसभा का चुनाव हुआ और भारतीय जनता पार्टी की पुनः प्रदेश में सरकार बनी। इस बार भी अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रचार के दौरान मेट्रो ट्रेन को जोर शोर से उठाया और लखनऊ के विकास में इस कार्य को अपना बताते रहे। मेट्रो को लेकर उनके बार-बार बयान सामने आये कि भाजपा ने मेट्रो के एक स्टेशन को आगे नहीं बढ़ाया। बावजूद यहां पर जनता ने एक बार फिर से समाजवादी पार्टी को नकार दिया।

चुनाव में ठाकुरगंज रुट का होता है जिक्र

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के मेट्रो कार्य में लखनऊ के ठाकुरगंज रुट का जिक्र चुनाव में जरुर होता है। घनी आबादी के बीच से मेट्रो का कार्य करना कठिन तो है, फिर भी अभियंताओं की टीम मेट्रो ट्रेन चलाने को जमीन तलाश रही है। नक्शे के अनुसार चारबाग से पाण्डेयगंज होते हुए ठाकुरगंज और इससे आगे वसंतकुंज तक मेट्रो ट्रेन चलनी है।

नौजवान को लुभाता मेट्रो, नेताओं को युवा

लखनऊ में निवास करने वाले नौजवानों को लखनऊ मेट्रो की सवारी सबसे ज्यादा पसंद है। समय बचाने और स्वच्छ वातावरण के बीच सफर को पूरा कराने वाले मेट्रो को नौजवान इस कारण से भी पसंद करता है कि मेट्रो स्टेशनों के नीचे बने वाहन स्टैण्ड पर वह अपने वाहन खड़ा कर सफर कर सकता है। मेट्रो स्टेशन के नीचे ब्रांडेड कम्पनियों की खाद्य सामग्रियों के बिकने के बाद ये पसंद और भी बढ़ी हैं।

निकाय चुनाव में फिर मेट्रो बना प्रचार का हथियार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीते चुनावों की तरह इस बार निकाय चुनाव में भी मेट्रो को प्रचार का बड़ा माध्यम बनाया है। सोमवार शाम को वह मेट्रो में सफर कर पार्टी उम्मीदवारों के लिए जनता से समर्थन मांगेंगे। इस दौरान वह मेट्रो में सफर करने वालों से भी मिलेंगे और बातचीत कर सपा को वोट करने की अपील करेंगे। सपा अध्यक्ष के मेट्रो में सफर करने को लेकर पार्टी हाईकमान के साथ-साथ स्थानीय पदाधिकारियों ने तैयारी पूरी कर ली है। देखने वाली बात यह होगी कि अखिलेश यादव का मेट्रो के जरिए नगर निकाय चुनाव में पार्टी के पक्ष में समर्थन जुटाना कितना कारगर साबित होगा।

रैली व जनसभाओं से दूरी कितना सही

उत्तर प्रदेश में विपक्ष की भूमिका में समाजवादी पार्टी प्रमुख दल है। निकाय चुनाव में भी सपा का मुख्य मुकाबला सपा से ही है। बावजूद इसके पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव नगर निकाय चुनाव में अपने उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए जनसभा और रैलियों से दूरी बनाए रहें। जबकि सत्ता दल भाजपा के उम्मीदवारों के लिए मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री से लेकर सभी प्रमुख नेतागण चुनाव मैदान में उतरकर रैली, जनसभाएं कर रहे हैं। ऐसे में अखिलेश का नगर निकाय चुनाव में पहले चरण से पूर्व मात्र मेट्रो से प्रचार के लिए उतरना उनकी चुनावी रणनीति को कितना सही साबित करेगी यह तो आने वाले परिणाम में देखने वाली बात होगी।

शरद

RELATED ARTICLES

Most Popular