– रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले मंजूरी देने के कई राजनीतिक मायने
– एक दशक बाद भारतीय सेना की जरूरत होगी पूरी, सैनिकों की युद्धक क्षमता और बढ़ेगी
नई दिल्ली (हि.स.)। लम्बे इन्तजार के बाद केंद्र सरकार ने भारत में एके-203 राइफलों का निर्माण करने को मंजूरी दे दी। रूस के सहयोग से उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा ऑर्डिनेंस फैक्टरी में पांच लाख से अधिक इन असॉल्ट राइफलों का उत्पादन किया जाएगा। आखिरकार एक दशक बाद भारतीय सेना की स्वदेशी आधुनिक असॉल्ट राइफल की तलाश एके-203 के रूप में पूरी होने वाली है जो इंसास राइफल की जगह लेगी। इसकी डिजाइन इस तरह से की गई है कि इसके इस्तेमाल से सैनिकों की युद्ध क्षमता और बढ़ जाएगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 6 दिसम्बर को होने वाली भारत यात्रा से पहले मंजूरी देने के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
भारतीय सेना को लगभग 7 लाख 70 हजार इन राइफलों की जरूरत है, जिनमें से एक लाख राइफल्स का रूस से आयात किया जाएगा और बाकी पांच लाख से अधिक का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 मार्च, 2019 को इस योजना का औपचारिक उद्घाटन उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा ऑर्डिनेंस फैक्टरी में कर चुके हैं। इसके बाद रूस के सहयोग से बनाई जाने वाली एके-203 की कीमत को लेकर सरकार से पेंच फंसने के कारण दो साल तक यह परियोजना वार्ताओं के दौर में उलझ गई थी। ‘मेक इन इंडिया’ परियोजना में देरी होने की वजह से भारतीय सेना को अमेरिका से 72 हजार सिग सॉयर राइफलें खरीदी और इसके बाद 72 हजार राइफल्स के लिए एक और ऑर्डर देना पड़ा।
भारत और रूस के बीच जनवरी, 2019 में हुए अनुबंध के समय प्रत्येक आयातित राइफल की कीमत लगभग 1,100 अमेरिकी डॉलर होने की उम्मीद थी लेकिन वार्ता आगे बढ़ने पर भारत में बनने वाली 6 लाख 50 हजार रायफलों की रॉयल्टी को लेकर रूस से मतभेद हो गए। इन मुद्दों को हल करने के लिए जून, 2020 में रक्षा मंत्रालय ने एक समिति का गठन किया। इसकी रिपोर्ट और सिफारिशें हालांकि सार्वजनिक नहीं हुईं लेकिन लगभग एक वर्ष तक कीमतों का मुद्दा लटका रहा। सितम्बर, 2020 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जब शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के लिए मास्को गए तो एके-203 राइफल के लिए सौदे को अंतिम रूप दिया गया लेकिन कीमतों को लेकर पेंच फंसा रहा। अब कीमत को लेकर फंसा पेंच दो साल की लंबी वार्ता के बाद सुलझ गया है।
इस परियोजना को इंडो-रशियन जॉइंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाएगा। यह राइफल एडवांस वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, मियूनीशेंन्स इंडिया लिमिटेड और रूस की रोसोबोरोन एक्सपोर्ट और कॉनकॉर्न कालाशनिकोव मिलकर बना रही है। इस परियोजना में देरी होने के मुख्य कारणों में से एक मोलभाव था। आखिरकार परियोजना को अंतिम मंजूरी देने का निर्णय 6 दिसंबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले लिया गया है। 7.62 X 39 एमएम कैलिबर की पहली 70 हजार एके-203 राइफल्स में रूसी कलपुर्जे लगे होंगे लेकिन इसके बाद पूरी तरह से यह राइफल स्वदेशी हो जाएगी। यह राइफल्स काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस में भारतीय सेना की परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाएंगी।
एके-203 राइफलों की खासियत
स्वदेश निर्मित इन राइफलों की लंबाई करीब 3.25 फुट है और गोलियों से भरी राइफल का वजन लगभग 4 किलोग्राम होगा। यह नाइट ऑपरेशन में भी काफी कारगर होगी क्योंकि यह एक सेकंड में 10 राउंड फायर यानी एक मिनट में 600 गोलियां दुश्मन के सीने में उतार सकती है। जरूरत पड़ने पर इससे 700 राउंड भी फायर किये जा सकते हैं। दुनिया को सबसे खतरनाक गन देने वाली शख्सियत का नाम मिखाइल कलाशनिकोव है। इन्हीं के नाम पर एके-47 का नाम पड़ा। एके का फुलफॉर्म होता है ऑटोमैटिक कलाशनिकोव।एके-203 असॉल्ट रायफल 300 मीटर की रेंज में आने वाले दुश्मन को यह छलनी कर देती है। एके-203 असॉल्ट रायफल की गोली की गति 715 किलोमीटर प्रति घंटा होती है। नई असॉल्ट राइफल में एके-47 की तरह ऑटोमैटिक और सेमी ऑटोमैटिक दोनों सिस्टम होंगे। एक बार ट्रिगर दबाकर रखने से गोलियां चलती रहेंगी।
