राजातालाब तहसील परिसर में जागरूकता शिविर
वाराणसी (हि.स.)। विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियो के साथ निर्वाचन आयोग मतदाताओं को ईवीएम और वीवीपैट के प्रयोग को लेकर भी संजीदा है। आयोग के निर्देश पर वाराणसी में कई स्थानों पर ईवीएम और वीवीपैट के प्रयोग को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाया जा रहा हे।
बुधवार को राजातालाब तहसील परिसर में शिविर लगाकर मतदान के लिए लोगों को जागरूक किया गया। ब्लाक कर्मियों तथा आईटीआई कर्मियों ने लोगों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के माध्यम से पड़ने वाले वोटों के तौर तरीकों को बताया। आराजी लाइन विकास खण्ड के बुच्चन राम के नेतृत्व में ब्लाक कर्मियों ने इवीएम को वीवीपैट के साथ जोड़कर वोट डालने की जानकारी लोगों को दी।
ट्रेनर कमलकांत सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बैलेट यूनिट और वीवीपैट यूनिट को जोड़कर नमूने का मत डालकर दिखाया। उन्होंने बताया कि पसंदीदा उम्मीदवार के आगे नीला बटन दबाते ही वोट पड़ जाएगा। ईवीएम में एक ओर प्रत्याशी का नाम,चिह्न तथा सामने बटन दिखेगा। उन्होंने बताया कि पूर्वाभ्यास के जरिये नए मतदाताओं को मतदान संबंधी जानकारी दी जा रही है। लोगों ने भी नमूना वोट डालकर वोटिंग करने का तरीका सीखा। तहसील राजातालाब पर तीन दिसम्बर से चल रहे जागरूकता कार्यक्रम में अब तक कुल तीन सौ लोगो ने मतदान करने की जानकारी ली ।
क्या है वीवीपैट
वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल या वीवीपैट इस बात की पुष्टि करता है कि एक मतदाता के रूप में आपने जिस उम्मीदवार को वोट किया है वह उसी को गया है।
मत डालने के तुरंत बाद काग़ज़ की एक पर्ची बनती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है। वीवीपैट की यह पर्ची मतदाता को नहीं दी जाती है। सिर्फ पोलिंग अधिकारी ही वीवीपैट की इस पर्ची को देख सकते हैं। चुनाव की मतगणना के वक्त किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में इन पर्चियों की भी गणना की जा सकती है। ईवीएम में लगे शीशे के एक स्क्रीन पर यह पर्ची सात सेकंड तक दिखती है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने यह मशीन 2013 में डिज़ायन की। सबसे पहले इसका इस्तेमाल नागालैंड के चुनाव में 2013 में हुआ था।
श्रीधर
