Saturday, March 28, 2026
Homeअन्यईरान एससीओ का नौवां पूर्ण सदस्य बना

ईरान एससीओ का नौवां पूर्ण सदस्य बना

नई दिल्ली(हि.स.)। ईरान शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का विधिवत सदस्य बन गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एससीओ की 23वीं शिखर वार्ता में ईरान के इस क्षेत्रीय राजनीतिक-सुरक्षा मंच में ईरान के 9वें सदस्य के तौर पर शामिल होने की घोषणा की गई।

प्रधानमंत्री मोदी सहित सदस्य देशों के नेताओं ने ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और वहां के लोगों को सदस्यता के लिए शुभकामना प्रेषित की।

रूस का पड़ोसी देश बेलारूस आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अगले वर्ष एससीओ का दसवां पूर्ण सदस्य देश बन जाएगा।

बीजिंग स्थित एससीओ सचिवालय में ईरान का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। एससीओ की स्थापना के समय इस संगठन में 6 सदस्य रूस, चीन, कजाकिस्तान, तजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और किर्गिस्तान थे। बाद में वर्ष 2017 में भारत और पाकिस्तान इसमें शामिल हुए।

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने वर्चुअल शिखर वार्ता को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में अमेरिकी मुद्रा डॉलर के वर्चस्व को समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग से क्षेत्रीय स्तर पर एक न्याय संगत व्यवस्था तैयार हो सकेगी। उन्होंने पश्चिमी देशों के सैन्य और मुद्रा संबंधी वर्चस्व को समाप्त करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उसके खिलाफ पश्चिमी देशों के मनमाने प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि इन देशों ने रूस के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ रखा है। उन्होंने एससीओ सदस्य देशों के बीच अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों, दबाव और उकसावे की कार्रवाइयों का रूस मुकाबला करेगा।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिमी देशों द्वारा अन्य देशों में सत्ता परिवर्तन की मुहिम (कलर रिवॉल्यूशन) छेड़ने का विरोध करते हुए क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एससीओ और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि आतंकवाद का उसके सभी रूपों में स्पष्ट और बिना लाग लपेट के विरोध होना चाहिए। उन्होंने सीमा पर आतंकवाद के संबंध में भारत की ओर संकेत करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का उपयोग कूटनीतिक ढंग से दांवपेंच के लिए नहीं होना चाहिए । उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शांति और स्थायित्व कायम रखना एसीओ सदस्य देशों के समान हित में है। यह दुनिया में आर्थिक विकास की पूर्व शर्त है।

शिखर वार्ता के लिए पहले एससीओ सदस्य देशों के नेताओं को नई दिल्ली आना था लेकिन बाद में शिखर वार्ता का आयोजन वर्चुअल मोड में करने का फैसला किया गया। संगठन की अगले वर्ष शिखर वार्ता कजाकिस्तान की अध्यक्षता में आयोजित होगी। आज शिखर वार्ता में विभिन्न नेताओं ने नई दिल्ली घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एससीओ सदस्य देशों के बीच सहयोग की भावी रूपरेखा का उल्लेख है।

अनूप

RELATED ARTICLES

Most Popular