लखनऊ(हि.स.)। उप्र ईंट निर्माता समिति के महामंत्री चन्द्रप्रकाश श्रीवास्तव गोपी ने कहा कि जीवन रक्षक दवाओं की भांति ईंट मूलभूत आवश्कता की वस्तु हो गयी है, इसके लिए इसे करमुक्त करने के बजाय ईंटों पर कर दर बढ़ाना जनहित में नहीं है।
गोपी श्रीवास्तव ने कहा कि 17 सितम्बर को लखनऊ में जीएसटी काउंसिल की बैठक में ईंटों पर कर की दर बिना आईटीसी के एक प्रतिशत के स्थान पर छह प्रतिशत और आईटीसी लेने पर पांच प्रतिशत के स्थान पर 12 प्रतिशत किये जाने का प्रस्ताव किया है। जो कि अप्रैल 2022 से प्रभावी हो जायेगा।
जीएसटी काउंसिल ने ईंटों पर कर दर बढ़ाकर सीधे जनहित की अनदेखी की है। विगत दो वर्षो से लगातार कोरोना महामारी के कारण ईंट निर्माण कार्य भारी वित्तिय घाटे में चल रहा है। सरकारी अर्धसरकारी कार्यो में लाल ईंटों की खपत बंद होने से भट्ठों पर ईंटों का स्टाक लगा है। बिक्री न होने से बिक्री दर काफी गिर गयी है।
समिति ने वाणिज्यकर कमिश्नर से पत्र लिखकर ईंटों को आगामी दो वर्ष के लिये करमुक्त किये जाने का अनुरोध किया था। सरकार ने हमारी पीड़ा पर ध्यान न देकर जीएसटी काउंसिल के माध्यम से ईंटों पर कर की दर बढ़कर भारी कुठाराघात किया है।
लखनऊ में ईंटें छह हजार रुपये प्रति हजार है और इसके अतिरिक्त आम ग्राहक को एक हजार रुपये भाड़ा किराया अतिरिक्त देना पड़ता है। कर के दर में वृद्धि का असर ईंट के कारोबारी सहित आम जनता पर भी पड़ सकता हैं।
