फिरोजाबाद(हि.स.)।जिले में एक मंदिर ऐसा भी है जहां सदियों से लड्डू पूड़ी के साथ मुर्गी के कच्चे अंडों से पूजा की जाती है। इस मंदिर पर बड़ी तादाद में श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। मान्यता है कि श्रद्धालु अंडा फोडने के बाद पीपल के वृक्ष के नीचे लड्डू पूडी का प्रसाद चढ़ाकर जो मन्नतें मांगते हैं वह पूरी होती है। यहां प्रतिवर्ष तीन दिवसीय मेला भी लगता है।
फिरोजाबाद जनपद के जिला मुख्यालय से करीब 10 किलो मीटर दूर थाना बसई मोहम्मदपुर के गांव बिलहना में यह मंदिर है। इस मंदिर को बाबा नगर सेन का मंदिर नाम से जाना जाता है। यहां बैशाख अष्टमी के दिन हर साल भव्य मेला लगता है जो तीन दिवसीय होता है। इस मेले में भारी मात्रा में श्रद्धालु का हुजूम उमड़ता है। मंदिर की मान्यता है कि यहां प्रसाद के रूप में बताशा, लड्डू, पूड़ी के साथ-साथ मुर्गी का कंच्चा अंडा भी चढ़ाया जाता है। ऐसा करने से बच्चों की सभी बीमारियां दूर हो जातीं हैं।
150 वर्ष पुराना है मंदिर
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जगन्नाथ दिवाकर बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण दिवाकर समाज के लोगों ने करीब 150 वर्ष पूर्व कराया था। उनके अनुसार पूर्वज दयाराम और रामदयाल के परिवार में एक बच्चे के शरीर में फोड़े पड़ गये और उसे दस्त हो गये। काफी उपचार कराने के बाद भी जब बच्चे की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, तब उन्होंने मध्यप्रदेश के जिला मुरैना दिमनी स्थित नगरसेन बाबा के मंदिर पर बच्चे के ठीक होने की मन्नत मांगी। मन्नत पूरी होने पर उन्होंने गांव के बाहर इस मंदिर का निर्माण कराया था तभी से यहां लगातार भक्त पूजा कर मन्नत मांगते है तथा मन्नत पूरी होने पर वह लड्डी पूडी के साथ मुर्गी के कच्चे अण्डे की भेंट चढ़ाते है। उन्होंने बताया कि बाबा नगरसेन तो शाकाहारी हैं और वह लड्डू, पूड़ी व नारियल का भोग लेते हैं, लेकिन उनके दोस्त भूरा सैय्यद मसान मांसाहारी है जो कि अण्डे से प्रसन्न होते हैं। इसीलिये भक्त यहां लड्डू, पूड़ी, नारियल के साथ अण्डे चढ़ाते हैं। यह परंपरा दशकों पुरानी है।
मंदिर पर लगता है भव्य मेला
बाबा नगरसेन मंदिर पर प्रतिवर्ष बैशाख अष्टमी के दिन भव्य मेला लगता है। यह मेला तीन दिवसीय होता है। इस मंदिर पर भारी संख्या में श्रद्वालु आते हैं, जो बाबा के दर्शन व पूजा पाठ के बाद मेले का लुफ्त उठाते हैं। बैशाख अष्टमी गुरूवार को आरम्भ हुए इस मेले के तीसरे और अंतिम दिन शनिवार को मंदिर पर श्रृद्वालुओं की भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने अंडा फोड़ने के साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे लड्डू पूड़ी का प्रसाद चढ़ाकर पूजा अर्चना की तो वही बच्चों ने झूलो का लुफ्त उठाया।
कौशल
