Thursday, January 15, 2026
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इलेक्टोरल बांड को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट राजी

नई दिल्ली(हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट इलेक्टोरल बांड को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई करने को तैयार हो गया है। आज याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए इस याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की।

प्रशांत भूषण ने कहा कि पिछले एक साल से इस याचिका पर सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हर दो महीने पर नए इलेक्टोरल बांड जारी किए जा रहे हैं। भूषण ने कहा कि आज की ही रिपोर्ट है कि कोलकाता की एक कंपनी ने आबकारी विभाग का छापा रुकवाने के लिए इलेक्टोरल बांड के जरिए 40 करोड़ रुपये का भुगतान किया। ये लोकतंत्र के साथ क्रूर मजाक है। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि कोरोना की वजह से सुनवाई नहीं हो रही थी। हम इस पर जल्द सुनवाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में विधानसभा चुनाव के दौरान इलेक्टोरल बांड की बिक्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस एसए बोब्डे की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि 2018 से इलेक्टोरल बांड की स्कीम लागू है। इसके बाद 2018, 2019 और 2020 में बिक्री होती रही। ऐसे में अभी रोक लगाने का कोई औचित्य नजर नहीं आ रहा है।

याचिका एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) नामक एनजीओ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल , असम और तमिलनाडु में चुनाव के दौरान इलेक्टोरल बांड के जरिये राजनीतिक दलों को अवैध फंडिंग को बढ़ावा मिलने की आशंका है।

एडीआर की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से कहा था कि सरकार ने इसका दुरुपयोग किया है। इससे कालेधन को बढ़ावा मिल रहा है। याचिका में इलेक्टोरल बांड स्कीम 2018 पर रोक लगाने की मांग की गई थी। उल्लेखनीय है कि 2019 के आम चुनाव के पहले इलेक्टोरल बांड पर रोक लगाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया था कि वे इलेक्टोरल बांड के जरिये मिले चंदे की जानकारी निर्वाचन आयोग को दें।

संजय/मुकुंद

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