मथुरा (हि.स.)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पेंशन के भुगतान पर कोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले में मथुरा के जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह मामले की अगली सुनवाई 12 मई को उन्हें पेश करे।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव के अपने आदेश में कहा है कि जिलाधिकारी को कानून के बुनियादी सिद्धांत का पता होना चाहिए। उन्होंने न्यायालय के आदेश के बावजूद अपना आदेश जारी कर अनियमितता बरती है। आदेश की एक प्रति मथुरा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को भी भेजी गई है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पुरानी पेंशन योजना का लाभ लेने से आवेदक को उनके द्वारा रोका गया है, जबकि कोर्ट उस संबंध में फैसला सुना चुका था। 11 फरवरी 2022 को आदेश का पालन करने के लिए नोटिस भी जारी किया। उसके बावजूद 18 अप्रैल को जिलाधिकारी नवनीत सिंह ने आवेदक के दावे को खारिज करते हुए आदेश कर दिया कि नियमितीकरण से पहले की गई सेवा का लाभ नहीं दिया जा सकता। जिलाधिकारी के इस आदेश को हाई कोर्ट ने घोर अवमानना माना। हाई कोर्ट ने कहा कि यह विश्वास नहीं होता कि ऐसा अधिकारी उस इरादे और सरल भाषा को कैसे नहीं समझ पाया। यह बहुत ही आश्चर्य की बात है। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद कैसे अपना आदेश जारी कर दिया। जिलाधिकारी ने जानबूझकर जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों का दुरुपयोग किया है।
हाई कोर्ट ने बृजमोहन शर्मा और तीन अन्य के अवमानना आवेदन पर यह आदेश 26 अप्रैल को जारी किया। बृजमोहन शर्मा की ओर से अधिवक्ता रोहित कुमार सिंह ने हाई कोर्ट में पैरवी की।
महेश/ सियाराम/ पवन
