इटावा (हि.स.)। प्रदेश में पूर्व सरकार के कार्यकाल में पर्यटकों के मनोरंजन के लिहाज से इटावा में बनाई गई थी। यहां सफारी के शेरों समेत अन्य वन्यजीवों को गोद लेने की योजना से प्रशासनिक और सत्ताधारियों की दखलंदाजी से अमलीजामा नहीं पहन सकी है।
असल में सफारी प्रबंधन से बिना किसी शीर्ष अफसर की रजामंदी के बाद इटावा सफारी पार्क के शेरों व अन्य वन्य जीवों को गोद लेने का खाका तैयार किया था। जिसमें कुछ कारोबारियों ने अपनी ओर से सकारात्मक रूख भी अपनाया था, लेकिन किसी भी बड़े अफसर की रजामंदी के बाद तैयार किये गये इसकी तैयारियों को लेकर सफारी प्रबंधन सवालों के घेरे में खड़ा हो गया। नतीजे के तौर पर सफारी प्रबंधन ने शेरों समेत अन्य वन्य जीवों को गोद लेने की योजना से अपने हाथ पीछे खीच लिये हैं।
इटावा सफारी पार्क के निदेशक राजीव मिश्रा ने कहा कि अभी इस योजना पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। अंतिम निर्णय हो जाने के बाद ही इस पर कोई विचार किया जाएगा।
इटावा सदर से भाजपा विधायक सरिता भदौरिया ने गोद लेने की सफारी की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सफारी में वन्यजीवों के अंगीकरण की व्यवस्था नही होगी। सफारी पार्क का सरकार पूरा ध्यान रखेगी और यहां के वन्यजीवों के लिए सभी व्यवस्थाएं कराईं जाएंगी। वन्यजीवों के अंगीकरण की व्यवस्था इटावा सफारी में लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इटावा सफारी पार्क में शेरों सहित जो भी वन्य जीव है उनका पूरा ध्यान रखा जाएगा सरकार से सफारी से पूरी मदद दिलाई जाएगी।
सदर विधायक ने कहा कि सफारी के लिए जो बजट की जरुरत होगी वह बजट भी दिलवाया जाएगा। सफारी के वन्यजीवों के भोजन और रख-रखाव में बजट की कमी नहीं रहेगी इसके लिए सरकार पूरी मदद करेगी। वन्य जीवों का अंगीकरण करके उनके लिए भोजन की व्यवस्था करने जैसी कोई प्रक्रिया इटावा सफारी में लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में वन्य जीवों के लिए बजट की कोई समस्या नहीं है। जिस तरीके की बातें कही जा रहीं हैं, जो बिल्कुल ही गलत हैं। सफारी प्रशासन को इस तरीके से प्रचार नहीं करना चाहिए था। इससे सरकार की छवि खराब होती है।
इस मामले में वन मंत्री से बात की जाएगी। जानवरों के भोजन के लिए लोगों से धन लेना कतई उचित नहीं है। बजट का अभाव दिखाकर निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।
दूसरी ओर से कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने कहा कि विश्व के मानचित्र पर इटावा का नाम रोशन करने वाली सफारी राजनीतिक उपेक्षा का शिकार हो रही है। लायन सफारी के जीवों के लिए बजट में कमी करना सरकार की शर्मनाक कार्यशैली है। राजनीतिक लड़ाई के नजरिए से इटावा को न देखकर कम से कम बेजुबान जानवरों पर से सहानुभूति रखनी चाहिए। जबकि यहां के ही बब्बर शेर गोरखपुर में बन रहे चिड़ियाघर के लिए भेजे जाने हैं। यह भेदभाव सबका विकास का नारा खोखला साबित करता है। लगता है कि बजट का अभाव दिखाकर सफारी को निजी हाथों में तो सौंपने की तैयारी की जा रही है।
समाजवादी पार्टी की चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डा.आशीष दीक्षित ने बताया कि इटावा के लिए यह दुर्भाग्य का विषय है कि लायन सफारी जैसी विश्व प्रसिद्ध योजना जो इटावा के साथ उत्तर प्रदेश के लिए लाभकारी साबित हो सकती थी। आज सरकार की उपेक्षा के कारण वन्य जीवों को गोद लेने की स्थिति तक पहुच गई है। उन्होंने कहा कि सफारी के निर्माण के साथ सपा सरकार ने इटावा मैं होटल व्यवसाय पर्यटन और बढ़ते रोजगार का सपना देखा था, जो आज धूमिल है।
सरकार वन्य जीवों को उपयुक्त भोजन और उनको संरक्षण देने की स्थिति मे भी नहीं है। हाल ही में नन्हे सावकों के आने से इटावा वासियों को बेहद खुशी का अनुभव हुआ था लेकिन सरकार द्वारा वन्य जीवों को गोद लेने की बात करना और जनपद वासियों से उनके भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाने की बात करना एक चिंतनीय प्रश्न है।
सरकार को चाहिए कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को राजनीति परिपेक्ष मैं न देख कर जनप्रयोगी योजना के रूप मे देखे। वही इटावा वासियों के लिए उत्तम होगा। सफारी प्रबंधन ने सफारी के वन्य जीवों को गोद लेने के लिए कुछ इस तरह की योजना तैयार की थी, जिसमें कोई भी व्यक्ति प्रार्थना पत्र देकर आवेदन कर सकता था। शेर के लिए 4.01 लाख, तेंदुआ के लिए 1.55 लाख, भालू के लिए 1.60 लाख, हिरन व एंटी लोप के लिए 50 हजार रुपये रखे गए थे।
इटावा : अफसरों और सत्ताधारी नेताओं के दखल के बाद भी सफारी के वन्यजीवों को गोद लेने की योजना हुई फेल
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