कछुओं के लिए मशहूर झील में बीते दिनों कानपुर से छोड़े गये थे 1300 कछुआ
वन विभाग की लापरवाही से जनहित कल्याण समिति ने जताया आक्रोश
इटावा (हि.स.)। लायन सफारी और मगरमच्छ प्रजनन केन्द्र सहित कछुओं के लिए अनुकूल वातावरण वाली अन्तरराष्ट्रीय रामसर झील इटावा जनपद की प्राकृतिक खूबसूरती को बयां कर रही है, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से कहीं न कहीं खूबसूरती पर दाग लग रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को उस समय वन विभाग बड़ी लापरवाही सामने आयी जब अन्तरराष्ट्रीय सरसईनावर झील में लगातार दो दिनों से सैकड़ों कछुए मर रहे हैं। हालांकि वन विभाग ने मरे हुए कछुओं को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए आगे की कार्रवाई शुरु कर दी है। माना जा रहा है कि झील में शिकारियों ने जहरीला दवा मिलाई है और जन कल्याण समिति ने आक्रोश जताया है। जनपद के सरसईनावर में खूबसूरत और प्राकृतिक सुंदरता लिए रामसर झील स्थित है। यहां पर कछुओं को रखा जाता है और कछुओं के लिए यहां का वातावरण पूरी तरह से अनुकूल है। बीते दिनों कानपुर में एसटीएफ ने तस्करों से बरामद 1300 कछुओं को भी यहीं पर वन विभाग की देखरेख में छोड़ दिया था। रविवार को लोगों ने कुछ कछुओं को मरा देखा था और इसकी जानकारी वन विभाग के कर्मचारियों को भी दी थी, लेकिन वन विभाग ने मामले की अनदेखी करते हुए नींद में सोया रहा। जनहित कल्याण समिति के अध्यक्ष तिलक सिंह शाक्य को मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने मंगलवार को झील पहुंचकर जमीनी हकीकत देखी। शाक्य ने सैकड़ों कछुओं को मरा देख डीएफओ राजेश वर्मा को जानकारी देते हुए नाराजगी जताई और मांग किया कि जिस वन दारोगा को जिम्मेदारी दी गयी थी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये। इस पर डीएफओ ने मौके पर वन दारोगा महावीर सिंह को भेजा, जिन्होंने कुछ कछुओं को पोस्टमार्टम कराने के लिए भेज दिया। वहीं लोगों को आशंका है कि शिकारियों ने शिकार करने के लिए झील में जहरीली दवा मिलाई होगी।
डीएफओ राजेश वर्मा ने बताया पिछले सप्ताह ही लगभग 1300 कछुए कानपुर में पकड़े गए थे, जिन्हें झील में छोड़ा गया था, उन्हीं में कुछ कछुओं के मरने की सूचना मिली है। कछुओं का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, साथ ही झील के पानी का सैंपल भी जांच के लिए भेजा जा रहा है। कितने कछुए मरे हैं, इसका आंकलन किया जा रहा है।जान बचाने के लिए झील से भागकर मिट्टी में घुसे कछुए
जनहित कल्याण समिति के अध्यक्ष तिलक सिंह ने बताया झील में दो दिन से लगातार कछुए मर रहे हैं, जिनकी संख्या सौ से भी अधिक हो सकती है। बताया कि झील के किनारे देखा गया कि कछुए अपनी जान बचाने के लिए पानी से बाहर आकर मिट्टी में घुस रहे हैं। इससे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि झील में जहरीली दवा नहीं मिलाई गयी। उन्होंने कहा कि झील में अभी काफी मरे कछुए उतरा रहे हैं और मिट्टी में दबे हैं। इसके बावजूद जिंदा कछुओं को बचाने का प्रयास वन विभाग ने नहीं किया है। काफी संख्या मे कछुओं को गायब भी करने की जानकारी हो रही है। कुछ दिन पहले ही कई अप्रवासी पक्षी भी मरे हुए पाए गए थे।
इटावा : अन्तरराष्ट्रीय रामसर झील में दो दिन से मर रहे सैकड़ों कछुए
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