Thursday, February 12, 2026
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इंग्लैंड में डेल्टा वैरिएंट ने मचाया कहर

11 दिनों में मामले दोगुने, बढ़ेगी मौतों की संख्या

नेशनल डेस्क

नई दिल्ली। भारत में कहर बरपा चुका कोरोना का डेल्टा वैरिएंट अब अन्य देशों में संक्रमण तेजी से फैला रहा है। ताजा उदाहरण इंग्लैंड है जहां इस वैरिएंट के मामले 11 दिन में दोगुने हो गए। कोरोना को लेकर संबसे सटीक शोध करने वाली संस्था इंपीरियल कॉलेज लंदन के अनुसंधानकर्ताओं ने अपने शोध में बताया है कि यह वैरिएंट इंग्लैंड समेत कई देशों में कोरोना की नई लहर बढ़ा सकता है। इसलिए टीकाकरण की रफ्तार और तेज करनी होगी। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में अनुमान जताया है कि 10 संक्रमित लोग औसतन 14 अन्य लोगों को संक्रमित करेंगे जिससे महामारी तेजी से फैल सकती है। इंपीरियल कॉलेज में संक्रामक रोग के प्रोफेसर स्टीवन रिले ने कहा, युवाओं में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। अगर यह वृद्धि इसी तरह जारी रही और बुजुर्ग भी प्रभावित हुए तो टीके 100 प्रतिशत कारगर नहीं होंगे। इससे अस्पतालों में भर्ती के मामले और मौतों की संख्या बढ़ेगी। इसलिए जरूरी है कि लोग टीके की खुराक लें और नियमों का पालन करें।

जून माह में ज्यादा मामले :

अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में 20 मई से सात जून के बीच लोगों के लिए गए नमूनों के आधार पर सामुदायिक संक्रमण (रीएक्ट-एक) का विश्लेषण किया गया। इसमें पता चला कि 670 में से एक या 0.15 प्रतिशत लोग संक्रमित हुए। फरवरी के बाद से संक्रमण, अस्पताल में भर्ती और मौत के मामलों के बीच जुड़ाव पाया गया, लेकिन अप्रैल के आखिर से अस्पताल में भर्ती होने के मामलों का रुझाव बदलने लगा। रीएक्ट कार्यक्रम के निदेशक और इंपीरियल कॉलेज के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर पॉल इलिएट ने कहा, हमें रीएक्ट-एक अध्ययन में मई से शुरुआती जून के बीच संक्रमण में गुणात्मक बढ़ोतरी के प्रमाण मिले। इंग्लैंड में औसतन 11 दिनों पर मामले दोगुने हो रहे थे। उन्होंने कहा, ये आंकड़े डेल्टा स्वरूप से जुड़े हैं और इससे पता चलता है कि समुदाय में संक्रमण दर और चिंताजनक स्वरूप को लेकर लगातार निगरानी रखने की जरूरत है। इससे कुछ दिन पहले डेल्टा स्वस्प के कारण मामलों में वृद्धि के मद्देनजर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने लॉकडाउन की पाबंदियों को खत्म करने में एक महीने के विलंब की घोषणा की थी। सबसे पहले भारत में डेल्टा स्वरूप की पहचान की गई थी। मालूम हो कि इम्पीरियल कॉलेज ने पहले भी कोरोना को लेकर कई अनुमान दिए थे, जो बाद में सही हुए। इम्पीरियल कॉलेज कोविड-19 रिस्पांस टीम का कहना है कि मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे सर्दियों में कोरोना की लहर और तेज होगी। बड़े पैमाने पर अस्पताल में भर्ती होने और मौतों की संख्ता में भारी इजाफा देखा जा सकता है। यूके में पाए गए एल्फा वैरिएंट के मुकाबले डेल्टा वैरिएंट 60 फीसदी ज्यादा संक्रामक है। और यह वैरिएंट वैक्सीन का असर भी कम करता है। यह दावा यूके के केंट पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि, बाकी वैरिएंट के मुकाबले डेल्टा वैरिएंट काफी संक्रामक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्फा की तुलना में डेल्टा वैरिएंट वैक्सीन का असर कम करता है, इसके लिए इंग्लैंड और स्कॉटलैंड ने एक शोध किया है। पहली खुराक के बाद अगर डेल्टा वैरिएंट किसी को संक्रमित करता है तो ये जोखिम बढ़ा सकता है। हालांकि अगर किसी व्यक्ति ने वैक्सीन की दोनों डोज ली हैं तो इसमें डेल्टा वैरिएंट इतना जोखिम भरा नहीं हो सकता है. लेकिन एल्फा वैरिएंट के मुकाबले ये वैक्सीन के असर को कम करता है।

80 देशों में फैला डेल्टा वैरिएंट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को बताया कि मूल रूप से भारत में खोजा गया कोरोना डेल्टा वैरिएंट अब दुनिया के 80 देशों में फैल गया है। पहले इसका असर 40 देशों में था। संगठन के मुताबिक, यूके जैसे कुछ देशों में डेल्टा प्रमुख तनाव बन गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि डेटा से पता चलता है कि डेल्टा वैरिएंट सबसे घातक हो सकता है। डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने को कहा कि ऐसी खबरें हैं कि डेल्टा संस्करण भी अधिक गंभीर लक्षण पैदा करता है, लेकिन उन निष्कर्षों की पुष्टि के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 10 मई को डेल्टा को चिंताजनक स्वरूप बताया था।

वैक्सीन लेने वाले देश भी सुरक्षित नहीं :

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन देशों में डेल्टा वैरिएंट कहर मचा रहा है उनमें से कई देश ऐसे हैं,जहां 60 फीसदी से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक ली है। यानि वैक्सीन लेने वाले देश भी इस वैरिएंट से सुरक्षित नहीं है। ब्रिटेन में लगभग 65 फीसदी लोगों ने वैक्सीन की दोनों खुराक ले ली है,फिर भी वहां डेल्टा वैरिएंट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने कोरोना वायरस के बेहद संक्रामक डेल्टा स्वरूप को चिंताजनक बताया है। सीडीसी ने कहा, अमेरिका में पाए जा रहे वायरस के स्वरूप बी.1.1.7 (अल्फा), बी.1.351 (बीटा), पी.1 (गामा), बी.1.427 (एप्सिलन), बी.1.429 (एप्सिलन) और बी.1.617.2 (डेल्टा) चिंता का विषय हैं। अमेरिका में अब तक ऐसा कोई स्वरूप नहीं है जिसका प्रभाव बहुत अधिक हो। उसने कहा कि डेल्टा स्वरूप में प्रसार क्षमता अधिक है। वायरस के किसी भी स्वरूप को चिंताजनक तब बताया जाता है जब वैज्ञानिक मानते हैं कि वह अधिक संक्रामक है तथा गंभीर रूप से बीमार कर सकता है। चिंताजनक स्वरूप की पहचान करने वाली जांच, उपचार और टीके भी इसके खिलाफ कम प्रभावी हो सकते हैं। इससे पहले सीडीसी ने डेल्टा स्वरूप के बारे में कहा था कि इस स्वरूप के बारे में और अनुसंधान की जरूरत है।

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