लखनऊ(हि.स.)। आशा वर्कर्स और आशा संगिनी कर्मचारियों के प्रतिनिधिमण्डल ने सोमवार को शासन की उच्चस्तरीय कमेटी से मुलाकात कर अपनी मांगों को रखा। बैठक में अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इन मांगों से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए तत्काल निस्तारण कराया जायेगा। अभी हाल ही में भारतीय मजदूर संघ ने आशा और आशा संगिनी वर्कर्स की समस्याओं को लेकर एक दिवसीए धरना दिया था।
पदाधिकारियों ने मांग की है कि आशा और आशा संगिनी वर्कर्स को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाय। सामाजिक सुरक्षा के ईपीएफ तथा ईएसआई का लाभ प्रदान किया जाय। जब तक ईएसआई की सुविधा नहीं दी जाती तब-तक उन्हें आयुष्मान स्वास्थ्य लाभ का कार्ड प्रदान किया जाय। उनकी यह भी मांग है कि आशा और आशा संगिनी वर्कर्स को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाया जाय। कोरोना ड्यूटी के दौरान वर्कर्स की मृत्यु पर 50 लाख की राशि प्रदान की जाय। ब्लॉक में ठहरने की व्यवस्था की जाय। वर्कर्स की उनकी योग्यता के अनुसार पर्यवेक्षक बनाया जाय। इसके अलावा उन्हें इलेक्ट्रिक स्कूटी और स्मार्ट फोन प्रदान किया जाय। इसके अलावा आशा को आशा संगिनी, आशा संगिनी को एएनएम पद पदोन्नति दी जाय। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में लगभग 01 लाख, 80 हजार आशा वर्कर्स एवं लगभग 10 हजार आशा संगिनी वर्कर्स ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध आशा और आशासंगिनी वर्कर्स कर्मचारी संगठन की राष्ट्रीय महामंत्री हेमलता ने बताया कि आशा और आशा संगिनी के कार्यो से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रातिकारी परिवर्तन हुआ है। बताया कि 2017 में प्रदेश में जब भाजपा की सरकार बनी तो काफी उम्मीदें थी कि इन्हें उचित मानदेय मिलेगा, लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है।
बताया कि इन मांगों को लेकर अपर मुख्य सचिव(ग्राम पंचायत) मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव(वित्त) संजीव मित्तल तथा अपर मुख्य सचिव(स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद के साथ आज उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में आश्वस्त किया गया है कि इन सभी समस्याओं का निस्तारण किया जायेगा। बैठक के दौरान नीरा सिंह, हेमलता, किरन शुक्ला तथा उषा वाजपेयी मौजूद रहीं।
