– झुलसा रोग, तना गला रोग, जड़ की सूड़ी का हो सकता है हमला
औरैया (हि.स.)। आलू की फसल में बीमारियों व कीटों की रोकथाम के लिए किसानों को सजग रहना जरूरी है। समय-समय पर फसल में लगी बीमारियों का उपचार एवं कीटों की रोकथाम कर किसान आलू की फसल की अच्छी पैदावार कर सकते हैं। यह जानकारी जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के पौध संरक्षण विशेषज्ञ अंकुर झा ने साेमवार को आलू किसानों को दी।
उन्होंने कहा कि आलू की फसल में आने वाली प्रमुख बीमारियों एवं कीटों की रोकथाम के लिए किसान भाई निम्नलिखित उपाय करें, जिससे फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। बताया कि आलू की फसल में अगेती झुलसा रोग की रोकथाम के लिए खाद व पानी को रोक कर कार्बेन्डाजिम और मैंकोजेब को 30 ग्राम एवं स्ट्रेप्टोसेसिक्लिन 2.5 ग्राम को 15 लीटर पानी में घोलकर सांयकाल के समय छिड़काव करें।
आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग की रोकथाम के लिए खाद वह पानी को रोक कर सिमोक्सानिल और मैंकोजेब को 30 ग्राम एवं स्ट्रेप्टोसेसिक्लिन 2.5 ग्राम को 15 लीटर पानी में घोलकर सांयकाल के समय छिड़काव करें। आलू की फसल में तना गलन रोग की रोकथाम के लिए खाद वह पानी को रोक कर सांयकाल में टूबेकोनाजोल नामक दवा को 30 ग्राम को प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
आलू की फसल में (मोजेक वायरस) एफिड चूसक कीड़ों की वजह से फसल में फैलता है। अगर इसका प्रकोप हो गया है तो इसके लिए बेहतर यही रहता है कि जिस पौधे में इसका प्रकोप हो उसे उखाड़ कर नष्ट कर दें और समय-समय पर कीटनाशक डायमिथोएट को 30 मिली. को 15 लीटर पानी में घोलकर सांयकाल के समय छिड़काव करें या थायमेथोक्सम 250 ग्राम/एकड़ की दर से प्रयोग करें।
आलू की फसल में (स्टेम बोरर/जड़ की सूड़ी) की रोकथाम के लिए समय-समय पर कीटनाशक रीजेंट दवा को आठ से 10 किलो ग्राम को सायंकाल के समय छिड़काव करें।
सुनील
