Tuesday, March 31, 2026
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आद्रा नक्षत्र में हुई अच्छी बारिश खरीफ की खेती के लिए फायदेमंद

-पुनर्वसु तक हो जानी चाहिए धान की रोपाई

लखनऊ (हि.स.)। इस वर्ष आद्रा नक्षत्र में हुई अच्छी बारिश से खरीफ की खेती बढ़िया होने के आसार हैं। अच्छी बारिश होने पर धान की रोपाई शुरू हो गयी है। आद्रा नक्षत्र अभी गुरुवार तक रहेगा। इसके बाद पुनर्वसु शुरू हो जाएगा। धान की रोपाई पुनर्वसु तक खत्म हो जानी चाहिए।

वैसे तो आद्रा में रोपा गया धान समय से अच्छी पैदावार देता है लेकिन देर होने की स्थिति में पुनर्वसु तक रोपाई हो जाय तो अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इस वर्ष आद्रा नक्षत्र में अच्छी बारिश भी हुई है। आद्रा नक्षत्र के बारे में महाकवि घाघ ने कहा है, ‘तपै मृगसिरा जोय तो बरखा पूरन होय’ पुनः, ‘अम्बाझोर बहै पुरवाई, तौ जानौ बरखा ऋतु आई’ यानी अगर अच्छी पुरवा हवा चली हो तो वर्षा भी अच्छी होती है। घाघ ने यह भी कहा है, ‘चढ़त बरसे अदरा, उतरत बरसे हस्त बीच बरसे मघा, चैन करे गिरहस्थ।’

27 नक्षत्रों में आद्रा छठा नक्षत्र है और पुनर्वसु सतवां। आद्रा को खेती किसानी के लिए जीवनदायी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस नक्षत्र के प्रवेश होते ही बारिश भी होती है, जिस वजह से यह धान की खेती के लिए बेहद जरूरी है। इस वर्ष की अच्छी बारिश ने किसानों के लिए जीवनदायिनी का काम भी किया है।

मान्यता के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र का गुरु राहु है। इस नक्षत्र से मिथुन राशि का निर्माण होता है। इसलिए इस पर मिथुन राशि के गुरु बुध का प्रभाव भी देखा जाता है। इस वर्ष यह छह जुलाई तक रहेगा। इसमें अच्छी बारिश होने के कारण किसानों में खुशहाली है।

ज्योतिषाचार्य मुनेन्द्र उपाध्याय का कहना है कि धान की खेती के लिए सात पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा और अनुराधा नक्षत्र महत्वपूर्ण हैं। कहा जाता है कि इन सात नक्षत्रों के बीच धान के पौधे का विकास अच्छी तरह से होता है। हस्त नक्षत्र को हथिया नक्षत्र भी कहा जाता है। यह नक्षत्र 16 दिनों का होता है। इसके 04 दिन को लोहा, 04 दिन को पीतल, 04 दिन को चाँदी और 04 दिन को सोना कहा जाता है। मान्यता के अनुसार हथिया नक्षत्र के अंतिम चरण में वर्षा हो जाये तो धान की उपज सोने के समान मूल्यवान हो जाती है। किसानों के लिए हथिया नक्षत्र में बारिश होना बहुत जरूरी है। अगर हथिया नक्षत्र में बारिश नहीं हुई तो धान के मरने की संभावना बढ़ जाती है।

स्वाति नक्षत्र धान के अंतिम चरण का नक्षत्र है। इस नक्षत्र में बारिश की जगह आसमान ओस की बारिश होती है। कहा जाता है कि धान को मजबूत और ताकतवर बनाने में ठंड एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर ठंड न पड़े तो इसका नकारात्मक असर धान की खेती पर दिखाई देता है।

उपेन्द्र/दिलीप

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