Friday, March 27, 2026
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आतंकियों की हितैषी सपा कारसेवकों पर गोली चलाने में महसूस करती है गर्व : बृजलाल

– भाजपा को छोड़ सभी राजनीतिक पार्टियों का प्रबुद्ध सम्मेलन है ढकोसला

कानपुर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासत गर्म हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष एक दूसरे की खामियां प्रचारित कर रहे हैं। इसी कड़ी में कानपुर पहुंचे पूर्व डीजीपी व राज्यसभा सांसद बृजलाल ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तंज की बौछार कर दी। कहा कि अखिलेश आतंकियों के हितैषी हैं और सपा कारसेवकों पर गोली चलाने में गर्व महसूस करती है।

योगी सरकार के साढ़े चार वर्ष पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी व राज्यसभा सांसद सोमवार को कानपुर पहुंचे। यहां पर उन तीनों विधानसभा में बैठक की जहां के वह प्रभारी हैं। इसके बाद जीटी रोड स्थित एक निजी होटल में प्रेस वार्ता कर सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। कहा कि अखिलेश यादव एनसीआरबी के आंकड़ों को लेकर योगी सरकार को घेर रहे हैं, जिनको नैतिकता के आधार पर कतई घेरने का अधिकार नहीं है, क्योंकि अखिलेश आतंकवादियों के सबसे बड़े मददगार हैं।

अखिलेश ने आतंकियों पर लगे केस वापस कराकर पुलिस का मनोबल तोड़ने का काम किया। बृजलाल ने कहा अखिलेश ने हमेशा आतंकवादियों और अपराधियों को पनाह दी है। लखनऊ कचहरी ब्लास्ट और बनारस में हूजी आंतकियों द्वारा किए बम ब्लास्ट किए गए। अखिलेश की सरकार आई और केस वापस लिये गये। लेकिन अदालत ने केस वापस नहीं लेने दिया और आतंकियों को फांसी व आजीवन कारावास की सजा हुई। इतना ही नहीं अखिलेश ने आतंकियों को पालकर पुलिस का मनोबल तोड़ने का काम किया है। मेरे खिलाफ भी अखिलेश ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था, जबकि आतंकवादी की मौत प्राकृतिक हुई थी। यह भी कहा कि कानून व्यवस्था पर अखिलेश को बयान देना शोभा नहीं देता, क्योंकि सपा कारसेवकों पर गोली चलाने को लेकर गर्व महसूस करती है।

एक साल बाद दिखेगा कमिश्नरेट का असर

पूर्व डीजीपी से सवाल किया गया कि कानपुर में कमिश्नरेट प्रणाली लागू हो गई, लेकिन अभी तक न तो पूरी क्षमता से जवान मिल पाये और न ही भवन। कानपुर कमिश्नरेट संसाधनों के आभाव में है और कानून व्यवस्था जस की तस है। इस पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि अभी छह माह कमिश्नरेट लागू हुए हैं, छह माह में संभव नहीं है कि सभी संसाधन जुटाये जा सके। एक साल बाद कमिश्नरेट का असर दिखेगा और अपराध फिलहाल कम हो रहे हैं। कहा कमिश्नरेट लागू होने से अब पुलिस कर्मियों को प्रशासन के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और पुलिस खुद निर्णय लेती हैं। अक्सर देखा जाता है कि दरोगा फाइल लेकर मजिस्ट्रेट के पास पहुंचता है, लेकिन मजिस्ट्रेट उस पर ध्यान ही नहीं देता। यह भी देखा जाता है कि संवेदनशील इलाकों में अगर कोई अनहोनी होती है तो मजिस्ट्रेट भाग खड़े होते हैं। इससे पुलिस अपना काम नहीं कर पाती, लेकिन कमिश्नरेट लागू होने पर पुलिस को मजिस्ट्रेटों के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ता। इसका लाभ जनता को मिलना स्वाभाविक है।

प्रबुद्ध सम्मेलन के नाम पर ढकोसला कर रहा विपक्ष

राज्यसभा सांसद ने कहा कि भाजपा राष्ट्र धर्म के साथ सबका साथ और सबका विकास नीति पर प्रबुद्ध सम्मेलन कर रही है। इसके न तो किसी जाति की अगुवाई रहती है न ही किसी धर्म की। वहीं विपक्ष की ओर से किया जा रहा प्रबुद्ध सम्मेलन सिर्फ ढकोसला है। बसपा का प्रबुद्ध सम्मेलन सिर्फ एक जाति तक सीमित रहा, जनता बसपा के नारा तिलक तराजू और तलवार, इनको… को कभी नहीं भूल सकती। सपा द्वारा किये जा रहे प्रबुद्ध सम्मेलन पर तो हंसी आती है, क्योंकि इस पार्टी में प्रबुद्ध नाम कोई शब्द ही नहीं है।

तीन सीटों के प्रभारी हैं बृजलाल

2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के आगे विपक्ष कहीं भी नहीं टिक पाया, लेकिन कानपुर की तीन सीटों पर भाजपा को जीत नहीं मिल सकी। इनमें दो सीटों पर सपा तो एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार विजयी रहा। यह सीटें आर्यनगर, सीसामऊ और कैंट हैं। इन तीन सीटों का प्रभारी बृजलाल को बनाया गया है। इसके पीछे यह भी बताया जा रहा है कि इन तीनों सीटों पर दलित समुदाय की अच्छी खासी तादाद है और दलित समुदाय के चलते ही विपक्ष मोदी लहर में सफल रहा।

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