आजमगढ़(हि.स.)। आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव का प्रचार अंतिम चरण में है। सपा यादव-मुस्लिम और राजभर मतों के भरोसे सीट पर दबदबा कायम करने की कोशिश में जुटी है तो बसपा मुस्लिम और दलित के भरोसे सीट छीनने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा सवर्ण के साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। इन सब के बीच भाजपा की पूरी कोशिश है कि किसी भी तरह मुस्लिम मतों में बिखराव हो और राजभर को पाले में करने के साथ ही कुछ यादव भी अपने पाले में किया जा सके। यही वजह है कि पार्टी ने न केवल आनन-फानन रामदर्शन को पार्टी में लिया बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से उनकी तारीफ भी की। वहीं सुशील आनंद के बहाने सपा को दलित विरोधी साबित करने की कोशिश की। साथ ही जमाली के बहाने मुस्लिमों को एहसास कराने की कोशिश किया कि सपा कभी उनका भला नहीं कर सकती।
मुख्यमंत्री योगी की दोनों जनसभाओं की मुख्य बातों पर ध्यान दें तो उनके मंच पर रामदर्शन यादव को विशेष प्राथमिकता दी गयी। योगी ने चार बार उनका नाम लिया। पहले उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद थी कि सपा रामदर्शन जैसे पुराने कार्यकर्ता को टिकट देकर सम्मानित करेगी। साथ ही मजाकिया अंदाज में कहा कि रामदर्शन जी आये हैं हमें उम्मीद है कि वे भी फिल्मों में काम करना चाहते हैं। चूंकि रामदर्शन यादव का मुबारकपुर और सदर विधानसभा में अच्छा जनाधार है। इसलिए योगी की पूरी कोशिश रही कि वे रामदर्शन के जरिये यादव मतदाताओं को साध सकें ताकि पार्टी प्रत्याशी की राह आसान हो सके। योगी ने दलित नेता, बसपा के संस्थापक सदस्य व पूर्व सांसद बलिहारी बाबू के पुत्र सुशील आनंद के बहाने यह बताने का प्रयास किया कि सपा दलित विरोधी है। उसके लिए सिर्फ परिवार मायने रखता है न कि स्थानीय नेता और कार्यकर्ता।
उल्लेखनीय है कि सपा ने उपचुनाव में पहले पूर्व सांसद बलिहारी बाबू के पुत्र सुशील आनंद को प्रत्याशी बनाया था लेकिन अगले दिन ही उनका टिकट काट दिया गया और उनके स्थान पर अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव प्रत्याशी बना दिया। इसे लेकर योगी ने तंज कसा कि अखिलेश ने एक दलित युवा को टिकट दिया और फिर टिकट वापस लेकर सैफई खानदान को दे दिया। इसके पीछे योगी की मंसा यह बताना था कि सपा दलित विरोधी है।
मुख्यमंत्री योगी ने बसपा प्रत्याशी गुड्डू जमाली के बहाने मुस्लिम मतदाताओं को भी संदेश देने का प्रयास किया कि सपा किसी मुस्लिम को आगे नहीं बढ़ा सकती है। उन्होंने कहा कि बसपा के प्रत्याशी को भी अखिलेश ने बुलाया था। विधानसभा चुनाव में टिकट देने का वादा किया था लेकिन टिकट न देकर उन्हें बेरोजगार कर दिया। उन्हें फिर वहीं जाना पड़ा। सपा की प्रवृत्ति ही धोखा देने की है। वहीं योगी ने सुन्नर यादव एवं मुन्नर यादव को भी याद किया। उन्होंने कहा कि गौरक्षक सुन्नर यादव की सपा सरकार में हत्या हुई, लेकिन सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। कुल मिलाकर योगी ने जहां अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश की वहीं यह भी प्रयास किया कि विपक्ष के वोटबैंक को कैसे बिखेरा जाय। अब देखना यह है कि योगी का दांव कितना सफल होता है।
राजीव
