वाराणसी (हि.स.)। मकबूल आलम रोड स्थित खजुरी से गिरफ्तार आईएसआईएस सदस्य बासित कलाम सिद्दीकी की असलियत सामने आने पर मोहल्ले वाले भी सन्न रह गये। इलाके के लोगों का कहना था कि बासित कोटा जाकर इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था। पिता अब्दुल कलाम अहमद सिद्दीकी और भाई अंडे के बड़े कारोबारी है। परिवार सम्पन्न है। पिता ने बेटे को इंजीनियर बनने के लिए कोटा पढ़ाई के लिए भेजा था। बासित कलाम सिद्की के एक पड़ोसी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह पहले सामान्य ही दिखता था। लेकिन जब से कोटा गया था तब से उसके बातचीत में कट्टरपंथ की झलक साफ दिखती थी। लेकिन आतंकी संगठन से जुड़ा होगा अंदाजा नही था। पड़ोसी ने बताया कि इस मोहल्ले के पैसे वाले सम्प्रदाय विशेष के लोग माफिया मुख्तार अंसारी से किसी न किसी प्रकार से जुड़े रहे हैं । पूर्व में कई बार बड़े अपराध में इन लोगों का नाम भी आता रहा हैं । लेकिन आतंकी संगठन से जुड़ाव गंभीर मामला है।
बासित कलाम सिद्दीकी को एनआईए ने उसके तीन मंजिला आलीशान घर मकबूल आलम रोड खजुरी से बीते बुधवार को पकड़ा था। घर से एनआईए ने आतंकी साहित्य के अलावा विस्फोटक तैयार करने संबंधी कई दस्तावेज भी मिले हैं। एनआईए ने कलाम के घर से मिले लैपटॉप और फोन को जब्त कर लिया है। कोटा जाकर इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाला बासित वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के दौरान आतंकी संगठन की विचारधारा से प्रभावित हुआ। ऑनलाइन माध्यम से ही वह संगठन के बारे में 3 महीने तक गहन अध्ययन किया। फिर, उसने इस आतंकी संगठन से जुड़ने का निर्णय लिया और आतंकियों का समर्थक बन गया। माना जा रहा है कि बासित की गतिविधियों पर एनआईए की नजर डेढ़ साल से थी। एनआईए ने 29 जून 2021 को एक मुकदमा दर्ज किया था। उसी दौरान छानबीन में सामने आया था कि बासित कलाम सिद्दीकी भारत में आईएस की ओर से कट्टरपंथी युवाओं की भर्ती में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। बासित आतंकी संगठन में आरोप है कि युवाओं की भर्ती कराने के साथ दहशत फैलाने और आतंकी विस्फोट के लिए इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के निर्माण के लिए काम आने वाले घातक रासायनिक पदार्थों के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहा था। वह ‘वॉयस ऑफ खुरासान’ पत्रिका के जरिए आईएसआईएस के लिए प्रचार सामग्री तैयार करने, प्रकाशन और प्रसार में शामिल था।’ वह आतंकी संगठन के ‘वॉयस ऑफ हिंद’ मॉड्यूल का ‘धुर चरमपंथी’ सदस्य के रूप में कार्य कर रहा था।
श्रीधर
