– पुस्तकालय उन्नयन और एक एन्डाउमन्ट फंड बनाने के अलावा, काग्निटिव साइंस डिपार्ट्मन्ट में ‘जय पुल्लुर नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन लेबोरेटरी’ की स्थापना में मिलेगा योगदान
कानपुर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने पूर्व छात्र स्वर्गीय जय पुल्लुर की स्मृति में ‘जय पुल्लुर न्यूरोसाइंस इनिशिएटिव’ शुरू करने की घोषणा की है। इसका एलान एक दिन पूर्व 21 जुलाई 2023 को आईआईटी कानपुर के आउटरीच ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में की गई थी।
इस पहल का उद्देश्य अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करके अत्याधुनिक तंत्रिका विज्ञान अनुसंधान को बढ़ावा देना है जो जैविक विज्ञान और बायोइंजीनियरिंग, काग्निटिव साइंस और गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी विभागों के बीच तंत्रिका विज्ञान से संबंधित अनुसंधान गतिविधियों को एक साथ लाएगा।
स्वर्गीय जय पुल्लर की पत्नी निर्मला जय पुल्लुर के 5 करोड़ रुपये के उदार योगदान से समर्थित, काग्निटिव साइंस में ‘जय पुल्लुर नॉन-इनवेसिव ब्रेन स्टिमुलेशन लेबोरेटरी’ और पीके केलकर लाइब्रेरी में ‘जय पुल्लुर वाचनालय’ का उद्घाटन श्रीमती पुल्लुर की उपस्थिति में किया गया। जिसमें स्वर्गीय जय पुल्लुर के भाई और बिजनेस पार्टनर विजय पुल्लुर व उनके परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल थे। प्रयोगशाला ब्रेन मैपिंग और स्टिमुलेशन के क्षेत्र में काम करेगी और वाचनालय में नए फर्नीचर और सिस्टम होंगे।
आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अभय करंदीकर ने शनिवार को इस पहल के शुभारंभ पर कहा कि ‘जय पुल्लुर न्यूरोसाइंस इनिशिएटिव’ की स्थापना के साथ हम आईआईटी कानपुर में तंत्रिका विज्ञान अनुसंधान में एक परिवर्तनकारी यात्रा शुरू कर रहे हैं, जो कि निर्मला जय पुल्लुर के उदार योगदान से संभव हुआ है। यह नेक प्रयास न केवल हमारे संस्थान को वैज्ञानिक उत्कृष्टता में सबसे आगे ले जाएगा बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारे पूर्व छात्र स्व0 जय पुल्लुर द्वारा छोड़ी गई अमिट छाप का भी सम्मान करेगा।
डीन ऑफ रिसोर्स एण्ड अलम्नाइ प्रोफेसर कांतेश बलानी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं स्वर्गीय जय पुल्लुर और निर्मला जय पुल्लुर को उनके उदार और अमूल्य योगदान के लिए हार्दिक धन्यवाद देता हूं। यह महत्वपूर्ण समर्थन हमारे प्रयासों को बल देगा, जिससे हम आईआईटी कानपुर में तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति करने और महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम होंगे। योगदान के एक हिस्से ने पीके केलकर लाइब्रेरी के वाचनालय को नए फर्नीचर और प्रणालियों के साथ उन्नत करने में भी मदद की है, जिसे अब ‘जय पुल्लुर वाचनालय’ नाम दिया गया है। मैं पूरे परिवार को उनकी उदारता के लिए धन्यवाद देता हूं।
एक नजर स्वर्गीय जय पुल्लुर पर
स्वर्गीय जय पुल्लुर ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग मैसूर से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1987 में आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग से एम.टेक किया। भारत के आईटी उद्योग में उन्होंने जो विरासत छोड़ी है, उसके लिए उन्हें सम्मानित किया जाता है। उन्होंने 1998 में हैदराबाद में अपने भाई विजय पुल्लुर के साथ प्रमाती टेक्नोलॉजीज की स्थापना की, और वो इसके दृष्टिकोण, रणनीति और टीम निर्माण के लिए जिम्मेदार थे। उनके अनुभवों की विशाल श्रृंखला हैदराबाद में अन्य आईटी संगठनों जैसे एचवाईएसईए, टीआईए चैप्टर, नैसकॉम चैप्टर आदि को पूरा करती है। सॉफ्टवेयर उद्योग में 25 वर्षों की सक्रिय सेवा के साथ वह प्रौद्योगिकी बाजार के लिए कई नए उत्पादों के निर्माण के लिए जिम्मेदार थे।
‘जय पुल्लुर न्यूरोसाइंस इनिशिएटिव’ के लॉन्च होने के साथ आईआईटी कानपुर न्यूरोसाइंस के छात्रों के लिए अनुसंधान और आउटपुट के दायरे को व्यापक बनाने में प्रगति करेगा।
मोहित/राजेश
