Wednesday, March 4, 2026
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आंवला नवमी पर किए गए जप-तप का फल होता है अक्षय

आंवला नवमी तिथि को लेकर पंचागों में मतभेद

कहीं शुक्र्रवार तो कहीो शनिवार को बताई जा रही नवमी

लखनऊ(हि.स.)। आंवले के वृक्ष की पूजा का त्योहार आंवला नवमी शनिवार को मनाई जाएगी। पंचागों के अनुसार कार्तिक मास की शुल्क पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी कहा जाता है। इस त्योहार को आंवला नवमी भी कहते हैं। इस दिन व्रत पर्व मेें भगवान विष्णु का का भी पूजन किया जाता है। महिलाएं आंवले के पेड़ के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करती हैं। आंवला भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। ठाकुरदास पंचाग के अनुसार आंवला शनिवार को ही मनाई जाएगी। हालांकि कुछ पंचागों में शुक्रवार को भी आंवला नवमी बताई गई है। वृक्ष के पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 6 बजकर:32 मिनट से 9 बजकर 37 मिनट तक है।

पेड़ की होती है परिक्रमा

पूजन में अक्षत, पुष्प, चंदन आदि से कच्चा धागा बांध कर सात बार परिक्रमा की जाती है। इस दिन आंवले के पेड़ का पूजन कर परिवार के आरोग्य व सुख -सौभाग्य की कामना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस तिथि में किए गए तप-जप व दान का फल अक्षय होता है। अर्थात जिसका कभी भी क्षय नहीं होता है।

धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता है कि आंवला नवमी पर पूजन से मनुष्य के कष्ट दूर हो जाते हैं और यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है। मान्यता है कि इस दिन इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से सभी रोगों का नाश होता है।

आंवला नवमी की कथा

एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण करने आईं। रास्ते में उनकी भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा एक साथ करने की इच्छा हुई। लक्ष्मी मां ने विचार किया कि एक साथ विष्णु व शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी उन्हें ख्याल आया कि तुलसी व बेल का गुण एक साथ आंवले में पाया जाता है। तुलसी भगवान विष्णु को और बेल शिव को प्रिय है।भारतीय संस्कृति में प्रकृति के संरक्षण को बहुत महत्व दिया गया है। इसलिए हिन्दू धर्म त्योहारों में वृक्षों, पशुओं को भी पूजने की परम्परा है।इसीलिए उनको महत्व देेने और पूजा करने के लिए एक तिथि निशचित की गई है।

आंवले के वृक्ष के नीचे ही बैठ कर खाते हैं

उ.प्र. हिन्दी संस्थान की संपादक अमिता दुबे बताती हैं कि हमारी सांस्कृतिक परम्परा में शुरुआत से वृक्षों और पशुओं को महत्व दिया गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पेड़ और पशु हमारा भरण-पोषण करते हैं । इस दिन पूजा में आंवले के वृक्ष में नया अनाज जैसे नये चावल की खील, चूड़ा, लइया व शक्कर के बने खिलौने गट्टे भी चढ़ाए जाते हैं। इस मुख्य रूप आंवला ही खाया जाता है। उसे आंवले की पेड़ के नीचे ही बैठकर खाते हैं।

आंवले में रोगों से लड़ने की होती है क्षमता

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अजय शर्मा बताते हैं कि आंवला शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें विटामिन सी प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें ऑक्सीडेंट होता है। रोगों से लड़ने की क्षमता होती है। आंवला शरीर में आंख, बाल, फेफड़ा व हड्डियों के लिए फायदेमंद है।

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