लखनऊ (हि.स.)। अस्पतालों से बेहतर समन्वय व संवाद स्थापित कर पुलिस विभाग अंग प्रत्यारोपण व ऊतक दान में अहम भूमिका निभाएगी। असामयिक मृत्यु से मरने वाले लोग, संभावित मृत व्यक्ति अंग और ऊतक दाता हो सकते हैं। पुलिस के पर्याप्त संवेदीकरण के कारण बिना पहल के छोड़ दिए जाते हैं। ऐसी सभी मौतें मेडिको-लीगल श्रेणी में आती हैं। इसलिए पुलिस अंग और ऊतक दान में एक अभिन्न भूमिका निभाती है क्योंकि ऐसे मामले पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और वे इन मौतों की जांच के लिए जिम्मेदार होते हैं ताकि परिस्थितियों और कारणों का पता लगाया जा सके। इसलिए प्रत्येक मृत्यु के लिए पोस्टमॉर्टम उनकी जांच का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन जाता है।
अंग और ऊतक दान में पुलिस की भूमिका पर व्याख्या करने के लिए और अंग दान प्रक्रिया में पुलिस द्वारा आवश्यक हस्तक्षेप के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा के लिए बुधवार को एसजीपीजीआई में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। एसजीपीजीआई के नोडल अधिकारी और विभागाध्यक्ष अस्पताल प्रशासन डा. आर. हर्षवर्धन और 112-यूपी मुख्यालय में एडीजी- ट्रैफिक एंड रोड सेफ्टी, अनुपम कुलश्रेष्ठ ने अपने -अपने विचार रखे।
112 से संबद्ध अधिकारियों की भूमिकाएं
एसओपी के अनुसार, पुलिस अंगदान की प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर, तत्काल पोस्टमॉर्टम की सुविधा प्रदान कर और अन्य कानूनी पहलुओं में उनकी जानकारी प्रदान करके, आवश्यकतानुसार शीघ्र सहायता प्रदान करेगी। यदि उन्हें मृत दाता से अंग दान प्रक्रिया में सहायता की आवश्यकता होती है तो अधिकृत प्रत्यारोपण केंद्र सीधे यूपी 112 को कॉल करेंगे। यूपी 112 संबंधित जिला नियंत्रण कक्ष या जिला पुलिस स्टेशन को सूचना अग्रेषित करेगा ताकि एसओपी के अनुसार कार्रवाई शुरू की जा सके।
एडीजी- ट्रैफिक एंड रोड सेफ्टी, अनुपम कुलश्रेष्ठ ने बताया कि जागरूकता सत्र का उद्देश्य पुलिस कर्मियों को अंगदान में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी देना है ताकि उत्तर प्रदेश राज्य में मृतक अंगदान दर को बढ़ाया जा सके।
बृजनन्दन
