9असग़र गोंडवी फॉउंडेशन की पहली सालगिरह पर संस्था की ओर से 13वीं तरही शेरी नशिस्त का आयोजन शबाहत हुसैन के शास्त्री नगर स्थित आवास पर किया गया। जिसकी सदारत डॉ असलम हाशमी कर्नलगंज और निज़ामत जमशेद वारसी ने की। सरपरस्ती जमील आज़मी ने फ़रमाई।
मेहमाने ख़ुसूसी ताहिर हसन ताबिश (ए डी ओ) ने डॉ अल्लामा इक़बाल की नज़्म ‘शिकवा’ पढ़ी। मेहमाने एज़ाजी समाज सेवी जुनैद मीनाई रहे। जमाल अख़्तर सदफ ने नात पढ़कर महफ़िल का आग़ाज़ किया।
जमील आज़मी ने कहा-
मेरी हक़्क़ानियत से चूर होकर
रहा बातिल हमेशा दूर होकर।
डॉ असलम हाशमी ने कहा-
लहू से अपने फिर रोशन करूंगा
दिए जो रह गए बेनूर होकर।
मुजीब सिद्दीक़ी ने कहा-
वो माहौले वतन अब बन रहा है,
कि ईदें आएंगी आशूर होकर।
डॉ आफ़ताब आलम ने कहा-
तराशा है जिन्हें दुश्वारियों ने
चमकते हैं वो कोहेनूर होकर।
नजमी कमाल ने कहा-
उठाएगी ये दुनिया फायदा ही
न कहिए हाले दिल मजबूर होकर।
आतिफ़ गोंडवी ने कहा-
बहुत उम्मीद थी जिस जिस से दिल को
वहीं टूटा है चकनाचूर होकर।
अफ़सर हसन ने कहा-
तलाशे लाख कोई तेरे जैसा
वो थक के बैठेगा मजबूर होकर।
अज़्म गोंडवी ने कहा-
किसी की मुस्कुराहट ने संभाला
जो घर लौटे थकन से चूर होकर।
जमशेद वारसी ने कहा-
अभी बाक़ी है जुम्बिश दस्तो पा में
अभी बैठो न तुम मजबूर होकर।
अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा-
चराग़ों को बहुत खलने लगा हूँ
मैं फैला जा रहा हूँ नूर होकर।
अरबाज़ ईमानी ने कहा-
तुम्हारे दिल में इतनी गन्दगी है
निकलना ही पड़ा मजबूर होकर।
मनीष कुमार ‘सोना’
अंधेरों से जो लड़ना जानता है
चमकता है जहाँ में नूर होकर।
अल्हाज गोंडवी ने कहा-
मज़ा जीने में क्या बाक़ी रहेगा
तेरे ज़ुल्मो सितम से दूर होकर।
किसी की मैं कलाई सूनी कर दूँ
किसी की माँग का सिंदूर होकर
ईमान गोंडवी
इनके अलावा नियाज़ क़मर, सैयद साजिद हुसैन, आमिल गोंडवी,मुजीब अहमद, अंजुम वारसी, अफसर हुसैन, सूफ़ी गोंडवी, इमरान मसऊदी, सुफियान मुजीब ने भी अपने कलाम पेश किये। इस मौके पर वली मुहम्मद ‘मामा’, इतरत हुसैन, फ़ैज़ बारी, शेख़ शम्स, डॉ आज़म आब्दी, शमील नीशू , परवेज़ आलम, राशिद खान, आरिफ रोशन, कलीम, क़ाज़ी अनवर, शाहज़ान, कमाल अब्बास,इरफ़ान अख़्तर, शाद, अफ़ज़ल, महज़यार आदि मौजूद रहे। आख़िर में शबाहत हुसैन ने मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।

