बांदा (हि.स.)। स्वास्थ्य विभाग की कुंभकरणी नींद से शहर का आवासीय इलाका आवास विकास स्वास्थ्य सेवाओं का हब बन गया है। जहां अनधिकृत रूप से मरीजों का न सिर्फ इलाज होता है बल्कि अब ऑपरेशन भी होने लगे हैं। शनिवार को इसका खुलासा तब हुआ, जब एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने मरीज का ऑपरेशन कर दिया, जिसकी मौत हो गई, जिससे हड़कंप मच गया। परिजनों ने बाहर शव रखकर हंगामा कर दिया।
मामला शहर कोतवाली अंतर्गत आवास विकास कॉलोनी में देव अल्ट्रासाउंड एवं यूनिक डायग्नोस्टिक सेंटर का है। बिसंडा थाना क्षेत्र के ग्राम चौसड़ निवासी राजकरण ने बताया कि मेरे बेटे कल्लू (28)का इलाज जिला अस्पताल कार्यरत डॉक्टर रामेंद्र कर रहे थे। उन्होंने बताया था कि तुम्हारे बेटे के पेट में फोड़ा है, ऑपरेशन करना पड़ेगा। इसके बदले में 40 हजार रुपए ले लिया था। ऑपरेशन के बाद कहा था, इसे अस्पताल में ले जाओ। शुक्रवार की रात हालत बिगड़ने पर इसी केंद्र पर फिर लाया गया और इसके बाद डॉक्टर ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि मुझसे जितना इलाज हो सकता था, मैंने कर दिया। अब इसे इलाज के लिए बाहर ले जाओ। रेफर करने के कुछ ही देर बाद मेरे बेटे की मौत हो गई।
मरीज की मौत हो जाने के बाद शनिवार को परिजनों ने अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया और कहा कि डॉक्टर के गलत इलाज के चलते ही मरीज की मौत हुई है। बताते चलें कि आवास विकास कॉलोनी आवासीय इलाका है। इसके बाद भी यहां बड़ी संख्या में अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी एक्स-रे आदि केंद्र खुल गए हैं। कुछ डॉक्टर यहां पर चोरी-छिपे अपने घरों में मरीज को देखने के बाद ऑपरेशन भी कर देते हैं और इसके बाद इन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करते हैं। यह सिलसिला यहां बरसों से चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग जानकर भी अनजान बना हुआ है। अब एक मरीज की मौत हो जाने से इस बात का खुलासा हो गया है कि यहां पर चोरी-छुपे डॉक्टर ऑपरेशन भी करते हैं।
इस बारे में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर एस एन मिश्रा ने बताया कि मृतक मरीज का हमारे अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हुआ। ऑपरेशन कहां पर हुआ है, इसका हमें पता नहीं है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब इतना बड़ा अस्पताल खुला हुआ है तो उन्हें इलाज यहां कराना चाहिए। हो सकता है, उन्हें कोई दलाल मिल गया हो जो उन्हें अल्ट्रासाउंड सेंटर ले गया हो।
अनिल/सियाराम
