जट्टारी,अलीगढ़। कोरोना काल में अभिभावकों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने निजी स्कूलों से फीस लेने पर रोक लगाई थी। इसके खिलाफ निजी स्कूल संचालकों ने हाई कोर्ट में याचिका डाली थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों को केवल टय़ूशन फीस लेने की इजाजत देते हुए अन्य किसी भी प्रकार की फीस लेने पर रोक लगा दी थी। साथ ही निजी स्कूल संचालकों को निर्देशित किया था की सभी स्टाफ को बिना कटौती के तनख्वा देने का आदेश दिया था।
जीविका चलाने के लिये सब्जी बेचने को मजबूर अध्यापक
हाई कोर्ट के इस आदेश से क्षेत्र के समस्त निजी स्कूलों के शिक्षकों में तनख्वा की उम्मीद जागी थी, लेकिन जिन शिक्षको ने आज तक अपने अथक परिश्रम से विद्यार्थियों का सुनहरा भविष्य बनाया। आज लॉकडाउन में न केवल उनका साथ छोड़ दिया बल्कि उनकी इस गंभीर समस्या को सुनने वाला तक कोई नहीं है। यही वजह है कि लॉकडाउन के प्रथम चरण के माह में निजी शैक्षणिक संस्थाओं से अपने शिक्षको का एक माह तक तनख्वा तो दिया परंतु जैसे जैसे लॉकडाउन बढ़ता गया संस्थाओं ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए। और शिक्षको को उनके हाल पर छोड़ दिया। आज आलम यह है कि अपने परिवार का भरण पोषण व परिवार की जीविका चलाने के लिए सब्जी बेचने नजर आ जाएंगे। उन्ही शिक्षको में से एक जट्टारी कस्बा में रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक हासिम खां जो कि डी आर जी इंटर कॉलेज में सोशलॉजी के अध्यापक थे। कॉलेज से निकाले जाने के बाद शिक्षक हासिम पर परिवार के भरण पोषण करने का कठिन भार आ पड़ा।जिसके चलते हासिम खां ने कस्बा के जरतौली मोड़ पर ठेले पर सब्जी बेचने का कार्य शुरू कर दिया। अध्यापक ने अपनी आंखों में आंसू लाते हुए बताया परिवार का पालन करने के लिए मजबूरन मुझे सब्जी बेचने का कार्य करना पड़ रहा है।
अलीगढ़ : बच्चों का सुनहरा भविष्य गढ़ने वाले शिक्षक आज जीविका चलाने को मोहताज
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