लखनऊ (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बाबा भीमराव अंबेडकर के 63 वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर नवयुग कन्या महाविद्यालय राजेंद्र नगर में समरसता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई।
ंगोष्ठी के मुख्य अतिथि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि बाबा साहब आम्बेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने युवा वर्ग का आवाहन किया कि बाबा भीमराव अंबेडकर के विचारों को हम लोग तभी सार्थक कर सकते हैं जब उनके बताए हुए मार्ग पर हम चलेंगे और तभी समाज में समरसता भी स्थापित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है इस संकल्प के साथ हम लोगों को आगे बढ़ना है और समाज में एक नए प्रतिमान स्थापित करना है। समाज सुधार डॉक्टर अंबेडकर की पहली प्राथमिकता थी।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता राष्ट्रधर्म के निदेशक मनोजकांत ने कहा कि अंबेडकर का सबसे मुख्य विचार था कि समाज का सबसे पीछे बैठा हुआ व्यक्ति जो है उसके जीवन में परिवर्तन दिखना चाहिए। इस संकल्प को लेकर बाबा साहब ने संविधान निर्माण का कार्य किया। उन्होंने कहा कि अधिकार और कर्तव्य दोनों की बात संविधान करता है हर व्यक्ति अधिकार की बात तो करता है लेकिन कर्तव्य की बात नहीं करता है जबकि अधिकार में भी कर्तव्य निहित होता है। यदि केवल अधिकार की बात की जाए तो अधिकार आपस में लड़ते हैं लेकिन यदि कर्तव्य की बात की जाए तो कर्तव्य आपस में कोई संघर्ष नहीं करता ह।ै हमें समाज में इस तरह की शिक्षा देनी चाहिए। संविधान अधिकार और कर्तव्य दोनों को लेकर बात करता है।
संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही ने कहा कि डा. अंबेडकर स्वतंत्रता समानता और भाईचारा तथा सर्वधर्म समभाव के सम्पोषक थे। अंबेडकर के विचारों को पूरी तरह से आत्मसात कर लेना ही बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने की।
इस अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री सत्यम मिश्रा, प्रोफेसर ए. .के पांडे और राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम इकाई की कार्यक्रम अधिकारी ऐश्वर्या सिंह द्वितीय इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ नेहा अग्रवाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
बृजनन्दन
