Saturday, February 14, 2026
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 अमेरिकी सेना प्रमुख ने भारतीय सेनाओं के साथ साझेदारी को बताया महत्वपूर्ण

– दोनों सेनाएं एक-दूसरे से सीखने के साथ ही दोस्ती को और ज्यादा कर रही हैं मजबूत

– आईपीएसीसी का मकसद भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना

नई दिल्ली (हि.स.)। अमेरिकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज ने इंडो-पैसिफिक में स्थिरता के लिए अमेरिका और भारतीय सेना के बीच साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों सेनाओं के बीच संबंध और मजबूत हो रहे हैं और हमारे सैनिक अपने कौशल को निखार कर सैन्य कला में महारत हासिल कर रहे हैं। यूएस सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों सेनाएं एक-दूसरे से सीखने के साथ ही आपसी विश्वास पैदा करके दोस्ती को और मजबूत कर रही हैं।

जनरल जॉर्ज भारत के साथ मेजबानी में मंगलवार से राजधानी के मानेकशा सेंटर में शुरू हुई दो दिवसीय 13वीं इंडो-पैसिफिक आर्मीज़ चीफ्स कॉन्फ्रेंस (आईपीएसीसी) को पहले दिन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 25-27 सितंबर के बीच भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका की सेनाएं 13वें द्विवार्षिक आईपीएसीसी, 47वें वार्षिक इंडो-पैसिफिक आर्मी मैनेजमेंट सेमिनार (आईपीएएमएस) और 9वें सीनियर एनलिस्टेड फोरम की मेजबानी राष्ट्रीय राजधानी के मानेकशॉ सेंटर में कर रही हैं।

अमेरिकी चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा कि यह विशेष रूप से दोनों देशों की सेनाओं के लिए सबसे बड़ा सम्मेलन है। इसका उद्देश्य आपसी समझ, बातचीत और दोस्ती के माध्यम से भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है। यूएस सेना प्रमुख ने कहा कि हमारे सैनिक भारत के साथ मिलकर अपने कौशल को निखार रहे हैं, अपनी कला में महारत हासिल कर रहे हैं और एक-दूसरे से सीख रहे हैं। वे हमारी सेनाओं के बीच विश्वास पैदा करके दोस्ती को गहरा कर रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक सुरक्षा माहौल में विश्वास और दोस्ती कितनी महत्वपूर्ण है, इसलिए सहयोगियों और साझेदारों का होना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

जनरल जॉर्ज ने भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम यहां आईपीएसीसी के बारे में बात करने के लिए आए हैं। इस सम्मेलन में हमारे सभी साथी सैन्य प्रमुख भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की योजना बनाने और आपसी विश्वास पैदा करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। अमेरिकी सेना प्रमुख के अनुसार युद्ध का चरित्र बदल रहा है, इसलिए सभी को अपने पेशेवर व्यवहार को मजबूत करने, मानकों और अनुशासन के बारे में बात करनी होगी। उन्होंने कहा कि एक साथ मिलकर हम अपनी एकता और सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत कर सकते हैं, यही स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को बनाए रखने का तरीका हो सकता है।

सुनीत/पवन

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