Tuesday, February 10, 2026
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अमेरिका में पढ़ रहे छात्र ने की हरियाणा में कोरोना मरीजों की मदद

-शगुन में मिले पैसों व चंदा एकत्र कर ली चार बॉय पैप मशीनें–कोरोना रोगियों के फेफड़ों को बचाने में होंगी मददगार

यमुनानगर। विदेश में पढ़ाई करते हुए एक बच्चा अपनी मिट्टी के प्रति मोह को नहीं त्याग पाया। बच्चे ने यमुनानगर में कोरोना पीडि़तों की मदद के लिए न केवल अपने पास बड़ों द्वारा शगुन के रूप में दी धनराशि को खर्च किया बल्कि सोशल मीडिया पर अभियान चलाकर चंदा भी एकत्र किया। मूल रूप से यमुनानगर निवासी वेदांत शर्मा इस समय अमेरिका के ओहियाे में पढ़ाई कर रहा है। वेदांत ओहियो में विलियम मेसन हॉई स्कूल की दसवीं कक्षा का छात्र है। जिसने चार बाय-पैप मशीनें स्वास्थ्य विभाग को प्रदान की हैं। वेदांत शर्मा के पास बडों से शगुन के रूप में प्राप्त 500 डॉलर थे, जोकि भारतीय करंसी के अनुसार करीब 36 हजार रुपये बनते हैं। वेदांत ने विदेश में ‘‘गो-फण्ड-मी’’ नामक वेब पेज बनाया तथा इसके जरिये उसने लगभग 4500 डॉलर और एकत्र किये। शगुन व वैबपेज से वेदांत ने मदद के लिये 3 लाख 60 हजार रूपये एकत्र किये।यमुनानगर के सिविल सर्जन डॉ.विजय दहिया ने बताया कि वेदांत शर्मा सिविल अस्पताल को सीधे मशीनें दान करना चाहता था ताकि सुविधाएं मरीजों तक जल्द से जल्द पहुँच सकें। अतः वेदांत के पिता संजय शर्मा ने उनके साथ संपर्क किया। डॉ. दहिया ने बताया कि वेदांत शर्मा ने बाय-पैप मशीन प्राप्त करने के लिये ‘‘1800सी-पैप.कॉम’’ में कार्य किया तथा जब वहां के मैनेजर को वेदांत शर्मा के उद्देश्य के बारे में पता चला तो मैनेजर ने उच्च अधिकारियों से बात कर अधिकतम् छूट के साथ वेदांत को बाय-पैप मशीन उपलब्ध कराई। जिससे की वेदांत तीन की जगह चार बाय-पैप मशीन स्वास्थ्य विभाग यमुनानगर को भेज पाया। वेदांत के पिता संजय शर्मा के अनुसार वह फोन के माध्यम से अपने बेटे के संपर्क में हैं। जिसके चलते उसे यहां के बारे में पता चलता रहता है। वेदांत ने उनसे बातचीत के बाद ही मदद की ठानी।क्या काम करती है बाय-पैप कोरोना संक्रमण के दौरान मरीज के फेफड़ों पर असर होता है। जिससे अकसर फेफड़े सिकुड़ना शुरू हो जाते हैं। यह मशीन फेफड़ों को खोलने के काम आती है। जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। 

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