Monday, March 30, 2026
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अमृत काल में मन, समाज व राष्ट्र की दुर्बलता को करें दूर : होसबाले

सुलतानपुर (हि.स)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने देश के लोगों को मकर संक्रांति पर सामाजिक समरसता कायम करने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि अमृत काल में मन, समाज और राष्ट्र की दुर्बलता को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के अंदर यह क्षमता है, भारत करवट ले रहा है। भारत का उत्थान अब प्रारंभ हो गया है इसीलिए हमें हर प्रकार के अंधकार को दूर करने प्रयास करना होगा।

होसबाले सुलतानपुर जिले में दो दिवसीय प्रवास के दौरान शुक्रवार को मंकर संक्रांति उत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के नव संक्रांति के जिस महाभियान को लेकर चला है, उसका आधार युवा वर्ग ही है। युवा वर्ग को चाहिए कि वे ‘अपनी दीक्षा, सबकी रक्षा, समानता एवं समरसता के मंत्र को जीवन में उतारे। उन्होंने कहा कि यदि हमारे जीवन में प्रामाणिता, निःस्वार्थ बुद्धि, प्रयत्न और परिश्रम है तभी हमें भारत माता की जय बोलने का नैतिक अधिकार मिलता है। समाज हमें सब कुछ देता है, हम क्या देते हैं, यह सोचना पड़ेगा। इसलिए सिर्फ भारत माता की जय बोलना ही नहीं बल्कि उसके लिए काम भी करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जिनके अंदर बड़प्पन है उसके लिए तो सारा विश्व ही कुटुंब है। सृष्टि किसी के साथ भेदभाव नहीं करती है। सूर्य, नदी, पेड़ सभी समान रूप से सभी को सेवा देते हैं। समाज ने मनुष्य को बांट दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर सर्वत्र हैं इस सत्य को समझने के प्रयत्न नहीं करते तो हम अंधकार में ही रहेंगे। अपनी संस्कृति की श्रेष्ठता सिर्फ उपदेश, म्यूजियम में, प्रदर्शनी में, ग्रंथों में, संगीत, नृत्य से सिद्ध नहीं होगा, यह सब तो हमें समझाने के लिए है। जब तक ये सब बातें हम अपने जीवन में नहीं उतारेंगे तब तक पुस्तक की बातें सार्थक नहीं होंगी।

सरकार्यवाह होसबाले ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने कितने प्रकार के कष्ट सहन किए, त्याग और बलिदान करके इस देश को स्वतंत्र बनाया। उनका भारत के बारे में क्या सपना था? उस सपने को हम समझें, उसको साकार करने के लिए आवश्यक प्रयत्न जीवन में करके दिखाएं। भारत के अंदर बुद्धि एवं प्रतिभा की कमी नहीं है। दुनिया के सामने हमारा आई.क्यू. कम नहीं है। अपने लोगों में उत्साह भरने एवं चेतना जागृत करने के लिए हमारे देश के महापुरुषों की मालिका (माला) दुनिया के किसी भी देश की सभ्यता से कम नहीं बल्कि सौ गुना अधिक है। हम विज्ञान, गणित, भाषा, संस्कृति में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैंं इसलिए अपने अंदर की क्षमता को जागृत करें।

कार्यक्रम में प्रांत संघचालक डॉ. विश्वनाथ लाल निगम, क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक रमेश, सह प्रांत प्रचारक मुनीष समेत कई गणमान्य उपस्थित रहे।

दयाशंकर

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