Friday, April 3, 2026
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अभ्यर्थियों का आरोप, बेसिक शिक्षा नियमावली का गला घोंट रहे अधिकारी

लखनऊ(हि.स.)। प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण लागू करने में हुई विसंगति के बाद सुधार करते हुये शासन की ओर से जारी 6800 चयनित अभ्यर्थियों में इसको लेकर काफी रोष व्याप्त है। इन अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री आवास और भाजपा कार्यालय का घेराव किया था, लेकिन उन्हें कहीं से कोई उचित आश्वासन व निदान नहीं मिला। आक्रोशित अभ्यार्थी अपनी मांग को लेकर आज एक बार फिर से एससीईआरटी का घेराव किया।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा वर्ष 2018 में कराई गई 69000 शिक्षक भर्ती में ओबीसी एससी आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया। बेसिक शिक्षा नियमावली का शासन-प्रशासन गला घोंट रहा है।

अमरेन्द्र पटेल का कहना है कि सरकार में बैठे अधिकारी हम अभ्यर्थियों को पिछले दो साल से गुमराह करते आ रहे हैं क्योंकि हम सभी दलित और पिछड़े वर्ग से आते हैं। अमरेंद्र पटेल ने आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भर्ती करते समय व्यापक स्तर पर घोटाला किया जब हम लोगों ने आंदोलन किया तो उन्होंने एक 6800 की सूची जारी कर हम लोगों को नियुक्ति देने की बात कही लेकिन इस मामले को कोर्ट में ले जाकर फंसा दिया और कोर्ट में कमजोर पैरवी की जिस कारण कोर्ट के आए आदेश से यह स्पष्ट हो रहा है कि यदि इस आदेश का पालन विभाग के अधिकारी करते हैं तो बेसिक शिक्षा नियमावली का एक तरह से गला ही घोटा जाएगा ऐसा ही आदेश आया है।

एससीईआरटी पर आंदोलन में शामिल महिला अभ्यर्थियों ने कहा कि सरकार और अधिकारी की मिलीभगत से इस भर्ती में ओबीसी और एससी समाज के अभ्यर्थियों को आरक्षण नहीं दिया गया जिस कारण से हम सब नियुक्ति पाने से वंचित हो गए। महिला अभ्यर्थियों ने सवाल करते हुए कहा की जब सरकार ने मूल चयन सूची रिविजिट कर चुकी है और 6800 लोगों को चयनित कर चुकी है तो फिर से रिविजिट की आवश्यकता क्या है।

इस मौके पर एससीईआरटी के सामने धरना देने वालों में रामा यादव, रीता शेखर, अन्नू पटेल, गंगा शरण, राजबहादुर, भोलानाथ, अमित गंगवार, रामदयाल लोधी, अंजुम गौतम आदि सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे।

बृजनन्दन

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